Crude Oil की कीमतों में खास बदलाव नहीं, प्राइसेज पर पड़ रहा इन दो बातों का असर

इस हफ्ते ब्रेंट में 0.6 फीसदी की मामूली मजबूती आई। डब्ल्यूटीआई फ्यूचर्स में इस हफ्ते 1.5 फीसदी कमजोरी दिख रही है

अपडेटेड Oct 21, 2022 पर 4:48 PM
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हाल में यूरोपीय यूनियन के रूसी ऑयल और ऑयल प्रोडक्ट्स पर बैन लगा देने से ऑयल की कीमतों को सपोर्ट मिला था।

Crude Oil की कीमतों में शुक्रवार को ज्यादा बदलाव नहीं हुआ। चीन से डिमांड बढ़ने की उम्मीदों को झटका लगा है। इधर, इंटरेस्ट रेट में लगातार बढ़ोतरी होने का असर एनर्जी की खपत पर पड़ने के आसार हैं। Brent Crude Futures 12 सेंट गिरकर 92.26 डॉलर प्रति बैरल था। यूएस डब्ल्यूटीआई फ्यूचर्स 11 फीसदी की कमजोरी के साथ 84.40 डॉलर प्रति बैरल था।

इस हफ्ते ब्रेंट में 0.6 फीसदी की मामूली मजबूती आई। डब्ल्यूटीआई फ्यूचर्स में इस हफ्ते 1.5 फीसदी कमजोरी दिख रही है। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व इनफ्लेशन को काबू में करने के लिए इंटरेस्ट रेट बढ़ा रहा है। अगले महीने होने वाली बैठक में भी उसके इंटरेस्ट रेट बढ़ाने की उम्मीद है।

एसपीाई एसेट मैनेजमेंट ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, "फेड के कई मेंबर्स इंटरेस्ट रेट को लेकर आक्रामक नीति बरकरार रखना चाहते हैं। इस हफ्ते में हुई बैठक में उन्होंने इंटरेस्ट रेट बढ़ाने पर जोर दिया। अब नजरें चीन पर लगी हैं। चीन में कोरोना को लेकर पाबंदियां खत्म होने से कमोडिटी की मांग बढ़ेगी। लेकिन, अभी इसकी उम्मीद नहीं दिख रही।"


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चीन विदेश से आने वाले लोगों के लिए क्वारंटीन पीरियड 10 दिन से घटाकर 7 दिन करने के बारे में सोच रहा है। हालांकि, इस बारे में अभी चीन सरकार की तरफ से औपचारिक रूप से कुछ नहीं कहा गया है। चीन दुनिया में क्रूड ऑयल का सबसे बड़ा आयातक है।

चीन ने कोरोना की महामारी को फैलने से रोकने के लिए कई तरह की पांबदियां लगा रखी हैं। इसका असर बिजनेस और आर्थिक गतिविधियों पर पड़ा है। इससे ऑयल की डिमांड घट गई है। कई एनालिस्ट्स का मानना है कि चीन सरकार की जीरो टॉलेरेंस पॉलिसी अगले साल तक जारी रह सकती है।

हाल में यूरोपीय यूनियन के रूसी ऑयल और ऑयल प्रोडक्ट्स पर बैन लगा देने से ऑयल की कीमतों को सपोर्ट मिला था। इसके अलावा ओपेक प्लस के ऑयल का उत्पादन घटाने से भी ऑयल की कीमतों को मजबूती मिली है। एएनजेड ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, "रोजाना उत्पादन में 20 लाख बैरल की कमी करने के ओपेक के फैसले का ऑयल मार्केट पर बड़ा असर पड़ सकता है। प्राइस कैप की वजह से रूस से सप्लाई में दिक्कत से मार्केट पर दबाव बढ़ सकता है।"

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