धनतेरस और दिवाली पर इंडिया में सोना-चांदी खरीदने का चलन रहा है। इसे शुभ माना जाता है। सोना बहुत महंगा होने से कई लोग इस मौके पर चांदी खरीदते हैं। वे चांदी के सिक्के या ज्वेलरी खरीदते हैं। अगर आप इस बार चांदी खरीदने वाले हैं तो आपके लिए यह जान लेना जरूरी है कि ज्वेलर्स इसकी कीमतों का कैलकुलेशन कैसे करते हैं।
आपको चांदी के सिक्के या ज्वेलरी खरीदते वक्त पहले ज्वेलर से कुछ बाते पूछ लेनी चाहिए। जैसे चांदी का रेट क्या है, क्या उस पर हॉलमार्क है, उसकी प्योरिटी कितनी है? साथ ही ज्वेलर्स से आपको रसीद भी लेनी चाहिए। आम तौर पर ज्वेलर चांदी की ज्वेलरी या कॉइन की जो कीमत आपसे वसूलता है, उसमें चांदी की कीमत, मेकिंग चार्ज, हॉलमार्क चार्ज (अगर है तो) और जीएसटी शामिल होता है।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि चांदी की ज्वेलरी की कीमत कैलकुलेट करने के लिए ज्वेलर प्रति ग्राम चांदी का रेट, ज्वेलरी का वजन और उसकी प्यूरिटी को ध्यान में रखता है। इसका फार्मूला यह है: प्रति ग्राम चादी का रेटXचांदी का वजनXचांदी की शुद्धता। इसे एक उदाहरण की मदद से समझा जा सकता है।
मान लीजिए आप चांदी की पायल खरीदना चाहते हैं। इसका वजन 42 ग्राम है। ज्वेलर आपको 64 प्रति ग्राम यानी 64,000 रुपये प्रति किलोग्राम की कीमत बताया है। इस चांदी की प्योरिटी 92.5 फीसदी है। फिर इसकी वैल्यू 42X64X0.925=2486.4 रुपये होगी। इस पर ज्वेलर आपसे मेकिंग चार्ज और जीएसटी भी वसूलेगा। अगर ज्वेलरी पर हॉलमार्क हुआ तो उसका भी चार्ज जोड़ेगा।
कुछ ज्वेलर सिल्वर ज्वेलरी पर मेकिंग चार्ज नहीं लेते हैं। कुछ ज्वेलर इसे अलग से जोड़ते हैं। इसलिए आपके लिए पहले ही ज्वेलर से इस बारे में पूछ लेना ठीक रहेगा। आपको ज्वेलर से खरीदारी की रसीद मांग लेनी चाहिए। यह भी चेक कर लें कि रसीद में सभी चीजों का उल्लेख है या नहीं। चांदी की प्योरिटी को भी ध्यान में रखना जरूरी है। 999 फाइननेस वाली सिल्वर को प्योर माना जाता है। यह ध्यान में रखना जरूरी है कि जहां देश के 282 जिलों की सोने की ज्वेलरी की हॉलमार्किंग जरूरी है वही चांदी की हॉलमार्किंग जरूरी नहीं है। ग्राहक अगर हॉलमार्क वाली चांदी की ज्वैलरी खरीदना चाहता है तो वह इसके लिए ज्वेलर से कह सकता है।