क्रूड ऑयल (Crude Oil) की कीमतों में शुक्रवार को तेजी आई। 5 सितंबर (सोमवार) को OPEC प्लस देशों की बैठक होने वाली है। इसमें ऑयल का प्रोडक्शन घटाने पर चर्चा होगी। अगर तेल उत्पादक कपनियां उत्पादन घटाती हैं तो इसका असर कीमतों पर देखने को मिलेगा। पिछले कुछ हफ्तों से क्रूड की कीमतों में नरमी आ रही है। इसकी वजह ग्लोबल इकोनॉमी में सुस्ती की आशंका है। उधर, चीन में कोविड-19 के चलते लगाई गई पाबंदियों से भी तेल की मांग घटने के आसार हैं।
ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 1.20 डॉलर यानी 1.3 फीसदी की मजबूती के साथ 93.56 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। यूएस वेस्ट टेक्सास इंटरमीडियट (WTI) क्रूड फ्यूचर्स 1.16 डॉलर यानी 1.3 फीसदी की तेजी के साथ 87.77 डॉलर प्रति बैरल पर था।
क्रूड ऑयल के दोनों ही बेंचमार्क प्राइसेज में गुरुवार को 3 फीसदी की गिरावट आई थी। इससे कीमतें दो हफ्ते के निचले स्तर पर पहुंच गई हैं। इस हफ्ते में ब्रेंट क्रूड में करीब 8 फीसदी और डब्ल्यूटीआई क्रूड में करीब 6 फीसदी की गिरावट आती दिख रही है।
ओपेक प्लस देशों की बैठक ऐसे वक्त होने जा रही है, जब क्रूड की कीमतों में गिरावट आ रही है। उधर, डिमांड में भी कमी आने के आसार हैं। इस बीच, सऊदी अरब ने कहा है कि क्रूड की सप्लाई कम बनी रहेगी। सऊदी अरब क्रूड ऑयल के सबसे बड़े उत्पादक देशों में शामिल है।
ANZ Commodities के एनालिस्ट डेनियल हाइंस ने कहा कि इस बात की उम्मीद कम है कि ओपेक प्लस देश क्रूड ऑयल का उत्पादन घटाने के बारे में फैसला लेंगे। लेकिन, सऊदी अरब क्रूड ऑयल की सप्लाई और उसकी कीमतों के बीच मिसमैच के बारे में सदस्य देशों का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश कर सकता है।
उन्होंने कहा कि सऊदी अरब सप्लाई साइड से जुड़े दूसरे मसलों को भी बैठक में उठा सकता है। इस हफ्ते ओपेक प्लस ने ऑयल की डिमांड में कमी आने का अनुमान व्यक्त किया। उसने कहा कि इस साल सप्लाई के मुकाबले डिमांड रोजाना 4,00,000 बैरल कम हो सकता है।
नेशनल ऑस्ट्रेलिया बैंक कमोडिटीज के एनालिस्ट बेडन मूरे ने कहा कि अगर ओपेक प्लस देश उत्पादन में कमी का फैसला लेते हैं तो इसका असर क्रूड की कीमतों पर पड़ेगा। इसकी वजह यह है कि क्रूड का ग्लोबल इनवेंट्री काफी कम है। उधर, यूरोप में एनर्जी का संकट दिख रहा है।
इनवेस्टर्स चीन में कोरोना को लेकर पाबंदियों का असर क्रूड ऑयल की कीमतों पर पड़ने की उम्मीद कर रहे हैं। चीन के शहर चेंगदू में गुरुवार को लॉकडाउन का ऐलान किया गया। इससे वोल्वो जैसी कंपनियों के उत्पादन पर असर पड़ेगा।