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Petrol-Diesel| क्रूड में तेजी जारी रही तो ग्लोबल प्राइसेज के मुताबिक पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ानी होंगी : HPCL Chairman

Hpcl के चेयरमैन मुकेश कुमार सुराना ने कहा कि अगर इंटरनेशनल मार्केट्स में क्रूड में तेजी जारी रहती है तो घरेलू बाजार में भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बदलाव करना होगा। उन्होंने कहा कि मांग के हिसाब से पेट्रोलियम की सप्लाई नहीं बढ़ रही है

MoneyControl Newsअपडेटेड Feb 25, 2022 पर 5:50 PM
Petrol-Diesel| क्रूड में तेजी जारी रही तो ग्लोबल प्राइसेज के मुताबिक पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ानी होंगी : HPCL Chairman
Hpcl के चेयरमैन मुकेश कुमार सुराना ने कहा कि अगर क्रूड की सप्लाई घटती है तो ऑयल की कीमतें और चढ़ेंगी। रूस की क्षमता रोजाना 1.1 करोड़ बैरल की है। लेकिन हमें देखना होगा कि वह कितना एक्सपोर्ट करता है।

यूक्रेन में रूस के हमले के बाद क्रूड का भाव 100 डॉलर प्रति बैरल पार कर गया है। इससे घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है। माना जा रहा है कि मार्च के दूसरे हफ्ते में ऑयल मार्केटिंग कंपनियां पेट्रोल और डीजल के प्राइसेज बढ़ा सकती है। पिछले करीब ढाई महीने से इंडिया में पेट्रोल और डीजल के भाव में बदलाव नहीं हुआ है। मनीकंट्रोल ने HPCL के चेयरमैन और एमडी मुकेश कुमार सुराना से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तेजी की संभावना सहित कई मसलों पर बातचीत की। यहां पेश है इंटरव्यू का प्रमुख अंश।

सुराना ने कहा कि अगर इंटरनेशनल मार्केट्स में क्रूड में तेजी जारी रहती है तो घरेलू बाजार में भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बदलाव करना होगा। उन्होंने कहा कि मांग के हिसाब से पेट्रोलियम की सप्लाई नहीं बढ़ रही है। इसके अलावा ओपेक क्षमता के बावजूद उत्पादन नहीं बढ़ा रहा है। रोजाना डिमांड और सप्लाई के बीच 9,00,000 बैरल का गैप है। रूस और यूक्रेन क्राइसिस के बारे में उन्होंने कहा कि दोनों देशों को बातचीत के जरिए मसले का समाधान करना चाहिए।

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उन्होंने कहा कि आज कोई भी देश लंबे समय तक युद्ध जारी रखने के बारे में नहीं सोच सकता है। यह पूछने पर कि रूस पर अमेरिकी प्रतिबंध का एनर्जी सप्लाई पर क्या असर पड़ेगा, उन्होंने कहा कि अगर सप्लाई में और कमी आती है तो ऑयल की कीमतें और चढ़ेंगी। रूस की क्षमता रोजाना 1.1 करोड़ बैरल की है। लेकिन हमें देखना होगा कि वह कितना एक्सपोर्ट करता है। जहां तक इंडिया की बात है तो हम रूस से ज्यादा आयात नहीं करते। लेकिन, ग्लोबल सप्लाई घटने का असर कीमतों पर पड़ सकता है।

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