भारत अपनी पेट्रोलियम जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों और रूस से आयात करता है। अब हालिया जारी हुए एक आंकड़े के मुताबिक जून में रूस से भारत को भेजे जाने वाले कच्चे तेल की कीमत यूक्रेन-रूस वॉर के बाद सबसे कम थी। भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के हालियां आकडों के मुताबिक माल ढुलाई लागत सहित रूस से आने वाले हर एक बैरल कच्चे तेल की कीमत 68.17 डॉलर थी। वहीं ठीक एक महीने पहले मई के महीने में यह कीमत 70.17 डॉलर प्रति बैरल पर थी। जबकि एक साल पहले ही जून के महीने में यह कीमत 100.48 डॉलर प्रति बैरल पर थी। हालांकि यह पश्चिमी देशों द्वारा मॉस्को पर लगाई गई 60 डॉलर की सीमा से अधिक है, लेकिन इस सीमा में शिपिंग शामिल नहीं है।
यूक्रेन वॉर के बाद से ही भारत बन गया है रूसी कच्चे तेल का बड़ा उपभोक्ता
रूस-यूक्रेन वॉर के बाद से ही भारत चीन के साथ रूसी कच्चे तेल का बड़ा उपभोक्ता बन गया है। केप्लर के डेटा से पता चलता है कि पिछले दो महीनों में भारतीय आयात में गिरावट आई है और अगस्त में इसमें और गिरावट आने की उम्मीद की जा रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि ओपेक+ देश तेल उत्पादन में कटौती करने पर अड़े हुए हैं। हालांकि एनालिटिक्स फर्म केप्लर अक्टूबर से दक्षिण एशियाई देशों में शिपमेंट में तेजी देख रही है।
इस आधार पर रूसी कच्चा तेल खरीदता है भारत
भारत आम तौर पर माल ढुलाई, बीमा और दूसरी लागतों के साथ डिलीवरी के आधार पर रूसी कच्चा तेल खरीदता है। इसमें खरीदार कच्चे तेल के ट्रांसपोर्ट के साथ सभी तरह की लॉजिस्टिक्स और रिस्क के लिए जिम्मेदार होता है भले ही शिपमेंट कॉस्ट एक लिमिट से कम ही क्यों ना हो। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, जून में इराक से आयात औसतन 67.10 डॉलर प्रति बैरल था, जबकि सऊदी अरब से आयात इससे कहीं अधिक 81.78 डॉलर प्रति बैरल था। भारत अपनी 88% तेल मांग की जरूरतों को पूरा करने के लिए आयात पर निर्भर है। भारत के तेल मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने शुक्रवार को नई दिल्ली में संवाददाताओं से कहा कि रूसी कच्चे तेल पर छूट कम हो गई है। रूस और सऊदी अरब द्वारा बाजार को आगे बढ़ाने के लिए आपूर्ति पर अंकुश लगाने का वादा करने के बाद हाल के हफ्तों में वैश्विक बेंचमार्क कीमतें चढ़ गई हैं।