Russian Crude की प्राइस लिमिट को लेकर तस्वीर साफ हो गई है। अमेरिका और यूरोपीय देशों के बीच 60 डॉलर प्रति बैरल (Russian Crude Price limit) की लिमिट पर सहमति बन गई है। G7 देशी की अगुवाई में हुई यह डील अगले हफ्ते से लागू हो जाएगी। सवाल है कि इस डील के लागू होने के बाद रूस से सस्ता तेल खरीदने वाले इंडिया का क्या होगा? क्या इंडिया पहले की तरह डिस्काउंटेड रेट पर रूस से तेल खरीद पाएगा? सरकार के सीनियर अधिकारी ने कहा है कि इस डील का इंडिया पर असर नहीं पड़ेगा। इंडिया पहले की तरह रूस से तेल खरीदना जारी रखेगा। उन्होंने कहा कि ऑयल ट्रेड में हर तरह के ऑप्शंस उपलब्ध हैं। ग्लोबल सप्लायर्स ने इंडिया को बिना रुकावट के सप्लाई जारी रखने का भरोसा दिया है। इंडिया ने रूस से ऑयल के जो सौदे किए हैं, उनकी सप्लाई 5 दिसंबर के बाद भी जारी रहेगी। रूस से सस्ता ऑयल खरीदने वाले देश प्राइस कैप से बचने के लिए नॉन-यूरोपियन शिपिंग लाइनर्स, इंश्योरेंस और फाइनेंस प्रोवाइडर्स के सेवाएं हासिल करने के तरीके तलाश रहे हैं।
रूसी तेल के 60 डॉलर प्रति बैरल के प्राइस कैप को लेकर जो समझौता हुआ है, उसके मुताबिक नॉन-ईयू देश रूस से क्रूड ऑयल खरीदना जारी रख सकेंगे। लेकिन, वे 60 डॉलर प्रति बैरल से कम प्राइस पर इसे नहीं खरीद सकेंगे। रूस अगर इस प्राइस से कम पर तेल बेचेगा तो शिपिंग, इंश्योरेंस और री-इश्योरेंस कंपनियां दुनियाभर में रूसी ऑयल के कार्गों को अपनी सेवाएं नहीं देंगी। चूंकि, सबसे बड़ी शिपिंग और इंश्योरेंस कंपनियां जी7 देशों में हैं, जिससे इस प्राइस कैप की वजह से रूस के लिए ज्यादा कीमत पर अपने ऑयल को बेचना मुश्किल हो जाएगा। साथ ही उन देशों के लिए रूस से तेल खरीदना का रास्ता बंद हो जाएगा, जो बहुत कम कीमत पर रूस से तेल खरीद रहे थे।
यूक्रेन पर हमले के बाद रूस से बढ़ा है इंडिया का इंपोर्ट
इस साल फरवरी में रूस ने यूक्रेन पर हमले शुरू किए थे। बदले की कार्रवाई में अमेरिका, यूरोप और जापान ने रूस पर कई तरह के प्रतिबंध लगा दिए। इन देशों ने रूस से आयात पर प्रतिबंध लगा दिए। फिर, रूस ने सस्ते भाव पर चीन और रूस को क्रूड आयल की बिक्री शुरू कर दी। इस साल रूस से इंडिया के ऑयल इंपोर्ट में तेज उछाल आया है। S&P Global Commodity Insights के डेटा के मुताबिक, अक्टूबर में रूस से इंडिया का ऑयल इंपोर्ट रिकॉर्ड हाई लेवल पर पहुंच गया। अभी, इंडिया मध्य पूर्व देशों के मुकाबले रूस से ज्यादा तेल खरीद रहा है।
S&P Global की हाल में जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि यूक्रेन पर रूस के हमले से पहले इंडिया को इंपोर्ट बास्केट में रूस की हिस्सेदारी 1 फीसदी से कम थी। अक्टूबर यह बढ़कर 42 लाख टन यानी 10 लाख बैरल प्रति दिन पहुंच गई है। इससे इंडियन इंपोर्ट बास्केट में रूस से आयात की हिस्सेदारी 21 फीसदी हो गई है। यह सऊदी अरब से इंपोर्ट के करीब और ईरान से इंपोर्ट के मुकाबले 21 फीसदी ज्यादा है।