Pulses Commodity News: सरकार ने मार्केट पार्टिसिपेंट्स के साथ की बैठक की है।सरकार ने रिटेलर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के साथ बैठक की है। बैठक में कंज्यूमर अफेयर्स सेक्रेटरी निधि खरे ने इंडस्ट्रीज ने सवाल किया है कि तुअर, उड़द के होलसेल दाम 10 फीसदी तक गिरे है। बावजूद उसके दालों के रिटेल दाम क्यों कम नहीं हो रहे है। उन्होंने बैठक में इंडस्ट्रीज ने कहा कि लोगों को दाम घटने का फायदा नहीं मिल रहा। हालात पर सरकार की नजर बनी हुई है।
दालों के रिटेलर्स असामान्य मुनाफा कमा रहे हैं। जरूरत पड़ने पर सरकार सख्त कदम उठाएगी। बता दें कि एक महीने में चने के होलसेल दाम भी गिरे हैं।
इस बीच दालों की महंगाई पर नजर डालें तो चना दाल की रिटेल महंगाई 1 महीने में 2.47 फीसदी बढ़ी है जबकि होलसेल महंगाई 2.36 फीसदी रही है। वहीं तुअर दाल की रिटेल महंगाई में 0.09 फीसदी की गिरावट देखने को मिली जबकि होलसेल मंहगाई में 0.37 फीसदी की कमी आई है। वहीं उड़द की रिटेल महंगाई में 0.71 फीसदी की बढ़त देखने को मिली जबकि होलसेल मंहगाई में 0.35 फीसदी की तेजी आई है।
वहीं मूंग दाल की रिटेल महंगाई 1 महीने में 1.34 फीसदी बढ़ी है जबकि होलसेल महंगाई 1 फीसदी बढ़ी है। वहीं मसूर दाल की महंगाई 0.80 फीसदी बढ़ी है जबकि होलसेल महंगाई 0.65 फीसदी बढ़ी है।
आने वाले दिनों में दालों की कीमतों में नरमी दिखेगी
JLV एग्रो के डायरेक्टर विवेक अग्रवाल ने कहा कि सरकार दालों की कीमतों को लेकर काफी चिंतित है। आनेवाले समय में दालों की कीमतों में नरमी देखने को मिल सकती है। देश में तुअर और उड़द का इंपोर्ट हो रहा है। विवेक अग्रवाल ने बताया कि पीली मटर का इंपोर्ट भी काफी बड़ी मात्रा में हुआ है। सरकार किसानों को दलहन के अच्छे दाम देना चाहती है।
उन्होंने इस बातचीत में आगे कहा कि सरकार दालों के रिटेल दाम भी कम रखना चाहती है। लेकिन रिटेल को काबू में करना सरकार के लिए संभव नहीं है।