रबी सीजन में रिकॉर्ड उत्पादन की उम्मीद, क्या मौसम और मध्यपूर्व जंग की पड़ेगी मार, जानें क्या है कहते है एक्सपर्ट

LV एग्रो के विवेक अग्रवाल ने कहा कि देश में दलहन का उत्पादन अच्छा रहने की उम्मीद है। देश में दलहन की सप्लाई अच्छी बनी हुई है। पीली मटर के इंपोर्ट पर सरकार के फैसले पर नजर है। देश में पीली मटर का इंपोर्ट जरूरी है

अपडेटेड Mar 21, 2026 पर 9:20 AM
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GGN रिसर्च के नीरव देसाई ने कहा कि सरसों की फसल पिछले साल से 10% ज्यादा संभव है। 108 लाख टन सरसों उत्पादन की उम्मीद है।

सरकार को इस साल रबी सीजन में रिकॉर्ड उत्पादन की उम्मीद है। सरकार मान रही है कि रबी सीजन में 1745.13 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न का उत्पादन होगा। सरकार को गेहूं का उत्पादन 2% बढ़ने की उम्मीद है जबकि दलहन के उत्पादन में भी 7% की बढ़त की उम्मीद है। तिलहन उत्पादन पिछले साल से ज्यादा रहने का अनुमान है।जिसमें गेहूं, दलहन और खाने का तेल अहम है, लेकिन जब फसलें कटने को तैयार है ऐसे में जिस तरीके के मौसम अपना रूप बदल रहा है। कहीं मार्च में ही पारा 40 डिग्री के पार निकल गया है तो कहीं पर बेमौसम बारिश हो रही है। पहले ला नीना आने की बातें हो रही हैं लेकिन अब एल नीनो की आशंका जताई जा रही है। वहीं अमेरिका और ईरान की जंग ने इंपोर्ट को महंगा कर रखा है। रुपया डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तरों पर जा पहुंचा है। इन सब के बीच क्या सरकार का अनुमान सही है या फिर अनुमान और असलियत में फर्क है। आइए जानते है क्या कहते है एक्सपर्ट।

WPPS के चेयरमैन अजय गोयल ने कहा कि सरकार को रिकॉर्ड गेहूं उत्पादन की उम्मीद है।117 मिलियन मीट्रिक टन उत्पादन की उम्मीद है। 4 मिलियन टन ज्यादा उत्पादन की उम्मीद है। इस साल गेहूं की बुआई ज्यादा हुई थी। सरकार ने गेहूं की MSP में भी बढ़ोतरी की थी। गर्मी बढ़ी तो क्वालिटी, क्वांटिटी पर असर पड़ेगा। बेमौसम बारिश का असर ज्यादा नहीं पड़ने की उम्मीद है।

मौसम की मौजूदा स्थिति गेहू्ं के लिए ठीक नहीं है। 2-4 दिन के लिए पारा चढ़ना चिंता की बात नहीं है। तापमान का बढ़ना जारी रहा तो फसल पर असर होगा। बारिश जारी रही तो यील्ड पर भी असर होगा। फसल खराब होने की आशंका सिर्फ 3-4% की है। मंडियों में गेहूं का भाव MSP से कम है। सरकार जल्द ही गेहूं की खरीद शुरू करेगी।


GGN रिसर्च के नीरव देसाई ने कहा कि सरसों की फसल पिछले साल से 10% ज्यादा संभव है। 108 लाख टन सरसों उत्पादन की उम्मीद है। उत्तर प्रदेश में सरसों का उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है। देश में मूंगफली की फसल भी अच्छी है। खाने के तेल में अब भी निर्भरता इंपोर्ट पर है। क्रूड में तेजी का असर खाने के तेल पर पड़ रहा है।

उन्होने आगे कहा कि जंग के कारण शिपिंग कॉस्ट लगातार बढ़ रही है। रुपए में रिकॉर्ड गिरावट से भी इंपोर्ट महंगा हुआ। इंडोनेशिया फिर से B50 पर काम कर रहा है। क्रूड में तेजी से बायोडीजल के लिए डायवर्जन बढ़ेगा। देश में सोयाबीन की आवक कम है। खरीफ सीजन में सोयाबीन का उत्पादन कम रहा। अभी सोयाबीन का 13-14 लाख टन का स्टॉक है। जून अंत तक सोयाबीन का स्टॉक 6 लाख टन संभव है। साथ ही देश में पाम का इंपोर्ट भी बढ़ने की उम्मीद है।

पाम, सोयाबीन की कीमतों में तेजी आ चुकी है। पाम, सोयाबीन के दाम $80-100 चढ़ चुके हैं। जंग का असर खाने के तेल की कीमतों पर पड़ रहा है। फ्रेट कॉस्ट $50 तक बढ़ चुके हैं। भारत का सनफ्लावर, सोया ऑयल का स्टॉक कम था। देश में पाम ऑयल का इंपोर्ट अच्छा रहा है। मार्च में 8 लाख टन पाम ऑयल का इंपोर्ट हुआ। अप्रैल में 6-7 लाख टन पाम ऑयल का इंपोर्ट होगा। सोया के मुकाबले सरसों के दाम कम हैं। सरसों के दाम कम रहे तो ब्लेंडिंग नहीं होगी।

खाने के तेल के दाम पहले ही बढ़ चुके हैं। आगे कीमतों में और तेजी की उम्मीद नहीं है।

JLV एग्रो के विवेक अग्रवाल ने कहा कि देश में दलहन का उत्पादन अच्छा रहने की उम्मीद है। देश में दलहन की सप्लाई अच्छी बनी हुई है। पीली मटर के इंपोर्ट पर सरकार के फैसले पर नजर है। देश में पीली मटर का इंपोर्ट जरूरी है। दलहन के दाम कम करने में पीली मटर मददगार होगी।

उन्होंने कहा कि युद्ध का असर अभी दालों पर नहीं दिख रहा है। हालांकि अगर युद्ध लंबा चला तो कीमतों पर असर जरूर दिखेगा। फ्रेट कॉस्ट अभी $10–15 तक बढ़ गई है। फ्रेट कॉस्ट ज्यादा बढ़े तो दालों के दाम बढ़ना तय है।अभी दालों की कीमतों में तेजी की उम्मीद नहीं है।

 

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