Agri Commodity: अमेरिका और ईरान के बीच भले ही बातचीत की बातें सामने आ रही हैं। भले ही पाकिस्तान के जरिए अमेरिका ने अपना समझौता प्रस्ताव ईरान को भेजा हो, लेकिन दोनों देशों का एक दूसरे पर हमला जारी है। फिर चाहे वो जुबानी हो या फिर गोला बारूद से। नतीजा कच्चा तेल चढ़ रहा है। जहाजों की आवाजाही सीमित है। कारोबारी अब भी कंटेनर की दिक्कतों से जूझ रहे हैं और इन सब का असर भारत पर पड़ रहा है। फिर चाहें वो खाने का तेल हो, दालें हों या फिर चीनी ही क्यों न हो। आइए डालते है एक नजर आज किन एग्री कमोडिटी में हलचल हो रही है।
चीनी की कीमतों में गिरावट
इंटरनेशनल मार्केट में चीनी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली। इंटरनेशनल मार्केट में शुगर का भाव 14.50/Lbs के नीचे फिसला है। कीमतों में एक महीने की ऊंचाई से गिरावट आई। कच्चे तेल की कीमतों और सप्लाई बढ़ने की उम्मीद से कीमतों में दबाव देखने को मिल रहा है। साथ ही ग्लोबल बाजार का आउटलुक अभी भी कमजोर है।
USDA ने भारत में चीनी का उत्पादन 12% बढ़ने की उम्मीद है। भारत में 33.6 मिलियन टन उत्पादन संभव है। मौजूदा सीजन में उत्पादन 30 मिलियन संभव है। बेहतर मौसम से ज्यादा उत्पादन की उम्मीद है। रिकवरी सुधरने से उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है।
केंद्रीय कैबिनेट ने गन्ने की FRP बढ़ाई है। 2026-27 सीजन के लिए 10 FRP बढ़ाई है। 365/क्विंटल की दर से किसानों को भुगतान होगा। पिछले साल `15/क्विंटल गन्ने की FRP बढ़ी थी। सरकार गन्ना उत्पादन को बढ़ावा देना चाहती है।
4 दिनों की तेजी का बाद कीमतों में दबाव देखने को मिल रहा है। मई का वायदा 16000 के नीचे फिसला है। एक दिन में 3% से ज्यादा की गिरावट आई। बीते 4 दिनों में हल्दी के दाम 4% से ज्यादा चढ़े थे। 2026 में अब तक करीब 8% की गिरावट आई। बाजार में सप्लाई बढ़ने के गिरावट आई।
NCDEX पर हल्दी की चाल पर नजर डालें तो जनवरी में हल्दी में 3 फीसदी की गिरावट दिखी। वहीं फरवरी में 8 फीसदी टूटा। मार्च में हल्दी की कीमतों 1 फीसदी , अप्रैल में 2 फीसदी और मई में 1 फीसदी चढ़ा।
इंटरनेशनल मार्केट में तेजी जारी है। 2 सालों के हाई से भाव $84/Lbs के ऊपर कायम है। अप्रैल में भी $82 के दाम पार निकले थे। अप्रैल 2024 में $93 के भाव करीब पहुंचे थे । कीमतों में लगातार चौथे महीने तेजी जारी है। 4 महीनों में करीब 30% की तेजी आई।
मंडियों में दलों के भाव MSP से नीचे फिसले
मंडियों में दलों के भाव MSP से नीचे फिसले। सप्लाई बढ़ने, मांग में गिरावट से गिरावट आई। बाजार को आगे दाम बढ़ने की उम्मीद कम है। चना और मसूर दाल की सप्लाई मंडियों में बढ़ी। जल्द ही मूंग एवं उड़द की फसल कटने लगेगी। कई राज्य MSP पर चना, मसूर खरीद रहे हैं। हाल में केंद्र ने चना खरीद की सीमा को बढ़ाई। महाराष्ट्र के चना उत्पादकों के लिए बड़ा फैसला है। खरीद सीमा बढ़कर 8.19 लाख मीट्रिक टन है। PSS के तहत सरकार ने खरीद की सीमा बढ़ाई है। महाराष्ट्र में खरीद की मियाद 30 दिनों के लिए बढ़ी। अब 29 मई 2026 तक महाराष्ट्र से खरीदारी होगी।
प्रोसेसर्स सीमित मात्रा में दलहन खरीद रहे हैं। चना, मसूर, तुवर और उड़द का इंपोर्ट जारी है। बाजार की मॉनसून पर नजर बनी हुई है। इस साल देश में कम बारिश की आशंका है। एल-नीनो के कारण कम बारिश की आशंका है।
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