इन दिनों भारत समेत दुनिया के कई बड़े देशों में तेल के बढ़ते दाम एक नई समस्या बन कर उभरे हैं। इस समस्या के पीछे एक मुख्य कारण ऑर्गनाइजेशन ऑफ पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कंट्रीज (OPEC) यानी जिन देशों से कच्चा तेल आता है, उनकी तरफ से तेल का प्रोडक्शन बढ़ाने में आनाकानी करने को भी माना जा रहा है। अब ऐसे में मजबूरन कई बड़े देश अपने रणनीतिक तेल भंडार या स्ट्रैटिजिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) से तेल निकालने की तैयारी में हैं। इसके लिए अमेरिका ने भारत, जापान और दक्षिण कोरिया के साथ मिलकर SPR से तेल निकालने और कर्ज पर तेल देने की योजना बनाई है।
सबसे पहले तो यह जान लीजिए कि आखिर ये SPR होता क्या है? ये एक रणनीतिक तेल भंडार होता है, जहां अपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए कई देश कच्चे तेल का कुछ स्टॉक रिजर्व में रखते हैं।
इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) के 29 सदस्य देशों के पास अपना SPR है, जिसमें भारत भी शामिल है। इन देशों में अमेरिका के पास दुनिया का सबसे बड़े SPR है। इनमें करीब 71.4 करोड़ बैरल तेल रखा जा सकता है। अमेरिका में 1975 में तेल संकट के बाद, SPR की शुरुआत हुई थी।
अब अगर भारत की बात करें, देश में 3.69 करोड़ बैरल तेल इमरजेंसी के तौर पर रखा जाता है। किसी आपातकालीन स्थिति में इससे करीब नौ दिनों तक काम चलाया जा सकता है। ऑयल प्यूरिफिकेशन यूनिट्स में भी 64.5 दिन के लायक कच्चा तेल रखा जाता है।
वहीं भारत कच्चे तेल की कीमतों में कमी लाने के लिए अपने रणनीतिक तेल भंडार से 50 लाख बैरल कच्चा तेल निकालने की योजना बना रहा है। PTI के मुताबिक, सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को बताया कि दूसरी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के साथ तालमेल बनाकर यह कच्चा तेल बाजार में लाया जाएगा। अधिकारी के मुताबिक, अगले हफ्ते-दस दिन में यह प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
उन्होंने बताया कि भारत के रणनीतिक भंडार से निकाले जाने वाले कच्चे तेल को मंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (MRPL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPCL) को बेचा जाएगा। ये दोनों सरकारी ऑयल प्यूरिफिकेशन यूनिट्स रणनीतिक तेल भंडार से पाइपलाइन के जरिए जुड़ी हुई हैं।
इस अधिकारी ने कहा कि इस बारे में औपचारिक घोषणा जल्द ही की जाएगी। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर भारत अपने रणनीतिक भंडार से और कच्चा तेल निकालने का भी फैसला ले सकता है।
भारत ने कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में जारी तेजी के बीच दूसरी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के साथ मिलकर अपने आपातकालीन तेल भंडार से कच्चा तेल निकालने का मन बनाया है। इससे कच्चे तेल की कीमतों में कमी आने का आधार तैयार होगा।
उधर भारत की योजना सामने आने के बाद अमेरिका ने भी अपने SPR से तेल निकालने की घोषणा का है। ब्लूमबर्ग के मुताबिक, अमेरिका ने फैसला किया है कि वह अपने रणनीतिक तेल भंडार (SPR) से 5 करोड़ बैरल तेल निकालेगा।
रिपोर्ट के मुताबिक, व्हाइट हाउस ने मंगलवार को एक बयान में कहा कि 5 करोड़ बैरल में से 3.2 करोड़ बैरल अमेरिकी स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व से अगले कई महीनों में एक एक्सचेंज के रूप में जारी किया जाएगा। वहीं 1.8 करोड़ बैरल तेल पहले से अधिकृत बिक्री से क्विक रिजर्व के रूप में जारी किया जाएगा।