'गोवा-बेंगलुरु की शादी हो तो बच्चा विशाखापत्तनम जैसा होगा'; नारा लोकेश ने बताया TCS को 99 पैसे में क्यों दी जमीन

आंध्र प्रदेश सरकार ने TCS को विशाखापत्तनम में 21.16 एकड़ जमीन सिर्फ 99 पैसे में दी है, जिससे ₹1,370 करोड़ का निवेश और 12,000 नौकरियों का रास्ता खुलेगा। सरकार इसे गुजरात मॉडल की तरह IT सेक्टर में बड़े निवेश खींचने की रणनीति मान रही है।

अपडेटेड Apr 17, 2025 पर 3:25 PM
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एक्सपर्ट का मानना है कि 99 पैसे में जमीन देना एक प्रतीकात्मक कदम है। (सांकेतिक तस्वीर)

आंध्र प्रदेश सरकार ने राज्य में IT सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। कैबिनेट ने टाटा ग्रुप की दिग्गज आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) को विशाखापत्तनम में 21.16 एकड़ की प्राइम जमीन सिर्फ 99 पैसे में देने की मंजूरी दी है।

ये फैसला मंगलवार को सचिवालय में हुई कैबिनेट मीटिंग में लिया गया। इसका मकसद विशाखापत्तनम को एक प्रमुख टेक्नोलॉजी हब के रूप में डेवलप करना है। इस पहल की अगुवाई आंध्र प्रदेश के IT और इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री नारा लोकेश कर रहे हैं, जो बीते कुछ महीनों से राज्य में बड़े पैमाने पर टेक निवेश आकर्षित करने की कोशिश कर रहे हैं।

TCS को जमीन देने पर क्या बोले लोकेश?


नारा लोकेश का कहना है कि हम आंध्र प्रदेश को आईटी हब बनाना चाहते हैं। उन्होंने कहा, 'हमारे पास बेहतरीन टैलेंट पूल है, शानदार इंफ्रास्ट्रक्चर है। राज्य सरकार के तौर पर हम बहुत ही सब्सिडाइज्ड दामों पर जमीन देने के लिए तैयार हैं। मैं मजाक में अक्सर कहता हूं कि अगर गोवा और बेंगलुरु की शादी हो और उनका कोई बच्चा हो, तो वह विशाखापत्तनम जैसा होगा। हमारे पास सब कुछ है।'

अपने बयान के जरिए लोकेश संदेश देना चाहते थे कि विशाखापत्तनम एक तरफ बीच और नैचरल ब्यूटी वाला टूरिस्ट स्पॉट है, जैसे कि गोवा। वहीं, दूसरी ओर यह बेंगलुरु की तेजी से उभरता हुआ आईटी और टेक्नोलॉजी हब है।

 

12,000 लोगों को मिलेगा रोजगार

इस जमीन पर TCS एक बड़ा डेवलपमेंट सेंटर बनाएगी। इसमें कंपनी लगभग ₹1,370 करोड़ का निवेश करेगी। इस प्रोजेक्ट से करीब 12,000 लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है। इससे न सिर्फ स्थानीय रोजगार को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि राज्य का IT इकोसिस्टम भी मजबूत होगा।

पिछले साल अक्टूबर में नारा लोकेश ने टाटा संस के हेडक्वार्टर्स जाकर TCS को आंध्र प्रदेश में निवेश के लिए प्रोत्साहित किया था। कई महीनों की बातचीत और फॉलो-अप के बाद यह प्रस्ताव इस हफ्ते कैबिनेट से पास हो गया।

गुजरात मॉडल से तुलना

एक्सपर्ट का मानना है कि 99 पैसे में जमीन देना एक प्रतीकात्मक कदम है। इससे ये संकेत जाता है कि सरकार IT कंपनियों के लिए एक फ्रेंडली माहौल बनाना चाहती है। यही रणनीति एक बार गुजरात में अपनाई गई थी। उस वक्त मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे और टाटा मोटर्स को साणंद में जमीन बहुत कम कीमत पर दी गई थी। वह फैसला बाद में गुजरात को मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने में काफी हम साबित हुआ।

अब आंध्र प्रदेश सरकार भी उसी तरह की रणनीति अपनाते हुए IT सेक्टर में बड़ा निवेश खींचने की कोशिश कर रही है।

टेक इंडस्ट्री के लिए स्पष्ट संदेश

सरकारी अधिकारियों का कहना है कि यह फैसला एक स्पष्ट संकेत है कि आंध्र प्रदेश बिजनेस-फ्रेंडली इकोसिस्टम बनाना चाहता है। आकर्षक शर्तों के साथ बड़े कॉर्पोरेट्स को आमंत्रित करके राज्य IT निवेश के लिए एक टॉप डेस्टिनेशन बनने की दिशा में बढ़ रहा है। इससे राज्य को लंबी अवधि में काफी फायदा होने की उम्मीद है।

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