कॉम्पिटिशन कमीशन ऑफ इंडिया (CCI) ने मारुति सुजुकी को कथित तौर पर कंपनी के डीलर्स की ओर से दिए जाने वाले डिस्काउंट को नियंत्रित करने के लिए 200 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। हालांकि, मारुति सुजुकी ने इस आरोप को गलत बताया है। CCI ने जांच में पाया था कि कंपनी अपने डीलर्स पर उसकी अनुमति के बिना पहले से तय लेवल से अधिक डिस्काउंट देने पर रोक लगा रही थी।
CCI ने कहा है कि यह रीसेल प्राइस मेंटेनेंस के समान है जिस पर कॉम्पिटिशन एक्ट के तहत प्रतिबंध है।
कानून के तहत एंटरप्राइसेज के बीच सप्लाई, स्टोरेज या प्राइस जैसे प्रोडक्शन चेन के विभिन्न हिस्सों के दौरान ऐसे एग्रीमेंट करने पर रोक है जिससे कॉम्पिटिशन पर नकारात्मक असर पड़ता है। इनमें कार मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां और डीलर्स भी शामिल हैं।
CCI ने बताया कि इस मामले में डिस्काउंट पर रोक लगाई जा रही थी जिससे कस्टमर्स के लिए प्राइस के साथ ही कंपनी के अंदर और अन्य कंपनियों के साथ कॉम्पिटिशन पर असर पड़ रहा था।
मारुति सुजुकी के प्रवक्ता ने कहा कि कंपनी इस ऑर्डर के पहलुओं को देख रही है और कानून के तहत उपयुक्त कार्रवाई करेगी।
देश के पैसेंजर व्हीकल्स मार्केट में मारुति सुजुकी की 50 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी है। हालांकि, हाल के वर्षों में इसे टाटा मोटर्स जैसी बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनियों से कड़ी टक्कर मिल रही है।