हाल में भारतपे (BharatPe) के मामले में नाटकीय मोड़ आया। भारतपे के बोर्ड के चेयमैन रजनीश कुमार (Rajinsh Kumar) ने कंपनी के को-फाउंडर अशनीर ग्रोवर (Ashneer Grover) की तीखी आलोचना की। रजनीश कुमार देश के सबसे बड़े बैंक SBI के चेयरमैन रह चुके हैं। उन्होंने कहा कि ग्रोवर को पूरे मामले में मैच्योरिटी दिखानी चाहिए थी। उन्होंने यह भी कहा कि ग्रोवर यह साबित करना चाहते हैं कि भारतपे में कॉर्पोरेट गवर्नेंस की जांच उनके खिलाफ बायस्ड है।
कुमार ने 23 फरवरी को मनीकंट्रोल से खास बातचीत में कहा था, "मैं इस बात से सहमत हूं कि अशनीर को मैच्योरिटी (भारतपे से जुड़े विवाद में) दिखानी चाहिए थी।...अशनीर की पूरी स्ट्रैटेजी यह साबित करने की है कि गवर्नेंस रिव्यू उनके खिलाफ बायस्ड है।" उन्होंने यह भी कहा था कि अगर ऑडिट रिपोर्ट में गवर्नेंस का मसला पाया जाता है कि बोर्ड उनके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए तैयार है।
भारतपे एक पेमेंट कंपनी है। यह शॉपकीपर्स को क्यूआर कोड के जरिए पेमेंट लेने की सुविधा देती है। कंपनी से जुड़ा यह मसला कॉर्पोरेट गवर्नेंस के उल्लंघन से जुड़ा है। कॉर्पोरेट गवर्नेंस के उल्लंघन के आरोप को लेकर ग्रोवर और कंपनी के बोर्ड आमने-सामने हैं। मसला शुरू होने पर ग्रोवर को जबरन छुट्टी पर भेज दिया गया। बोर्ड ने उनकी पत्नी माधुरी जैन (Madhuri Jain Grover) ग्रोवर को भी छुट्टी पर जाने को कह दिया। लेकिन, यह मामला यही खत्म नहीं हो जाता है। इस मामले की शुरुआत एक ऑडियो क्लिप सामने आने से हुई थी। इसमें ग्रोवर एक बैंक के इंप्लॉयी को गाली देते सुनाई देते हैं। लेकिन, जल्द यह मामला कॉर्पोरेट गवर्नेंस से जुड़े बड़े मसले में तब्दील हो गया।
भारतपे में कॉर्पोरेट गवर्नेंस के उल्लंघन का गंभीर मामला सामने आया है। इनमें कुछ कंसल्टेंट्स को फेक इनवॉयस से पेमेंट शामिल है। कंसल्टेंट्स को कुछ संदिग्द पेमेंट्स की जानकारियां भी सामने आई हैं। ग्रोवर ने 22 फरवरी को भारतपे की पेरेंट कंपनी Resilient Innovations को एक लेटर लिखा था। इसमें कहा गया था कि कंपनी के दूसरे को-फाउंडर भाविक कोलाडिया ने उन्हें फोन कर एक जगह मिलने के लिए बुलाया था। उनसे मीटिंग के एजेंडा के बारे में नहीं बताया गया था। उन्होंने यह भी दावा किया था कि जब उन्हें फोन कॉल आई थी, तब कुमार भी उनके साथ थे। उन्होंने कुमार पर उनके खिलाफ बायस्ड और प्रिजूडिस्ड और कोलाडिया पर बदतमीजी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उनके पास उचित कानूनी कदम उठाने का अधिकार है।
कुमार ने कहा है कि ग्रोवर के लेटर का कंपनी और उसके बोर्ड पर कोई असर नहीं पडे़गा। बोर्ड उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए तैयार है। हालांकि, भारतपे के चैयरमैन ने आश्वस्त किया है कि कंपनी संकट से बाहर निकलने में कामयाब रहेगी, लेकिन बोर्ड और अशनीर के बीच आरोप-प्रत्यारोप से संकेत मिलता है कि कंपनी से कुछ गहरे मसले जुड़े हैं।
अभी इस मसले से जुड़े तथ्यों को लेकर तस्वीर साफ नहीं है। दोनों पक्षों की अपनी-अपनी दलीलें हैं। लेकिन यह बिल्कुल स्पष्ट है कि भारतपे को जल्द से जल्द कंपनी के कामकाज को सही करना होगा। इस मसले का निपटारा पीएमसी बैंक के हितों के लिए बहुत जरूरी है। पीएमसी बैंक के डिपॉजिटर्स के लिए भी इस मामले का निपटारा जरूरी है, जो अब भी अपने पैसे की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। भारतपे और सेंट्रम यूनिटी स्मॉल फाइनेंस बैंक के प्रमोटर हैं। यूनिटी स्मॉल फाइनेंस बैंक में पीएमसी बैंक का विलय हुआ है।
पीएमसी बैंक क्राइसिस खुद सालों तक जारी फ्रॉड और कॉर्पोरेट गवर्नेंस के उल्लंघन का नतीजा है। पीएमसी बैंक को बचाने (डूबने से) वाले बैंक का ट्रैक रिकॉर्ड शानदार और कॉर्पोरेट गवर्नेंस स्ट्रक्चर मजबूत होना जरूरी है। तभी पीएमसी बैंक के ग्राहकों का भरोसा बहाल होगा। सेंट्रम ने कहा है कि भारतपे से जुड़े मसलों का असर यूनिटी स्मॉल फाइनेंस बैंक पर नहीं पड़ेगा। लेकिन, यह आश्वासन काफी नहीं है। भारतपे को खुद को साफ-सुथरा रखने की जरूरत है।