Q1 earnings outlook : जानिए पहली तिमाही में किन सेक्टर के नतीजों में रहेगी तेजी, कहां दिखेगा दबाव

पहली तिमाही में फाइनेंशियल, रिटेल, कंज्यूमर ड्यूरेबल, मल्टीप्लेक्स और केमिकल सेक्टर में मुनाफा बढ़ता नजर आ सकता है। वहीं कमोडिटी से जुड़ी कंपनियों के नतीजे मिल जुले रह सकते हैं

अपडेटेड Jul 11, 2022 पर 1:20 PM
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एनालिस्ट ने अपनेEPS अनुमान घटा दिए हैं। HDFC Securities का कहना है कि वित्त वर्ष 2023 में EPS अनुमान में और कटौती हो सकती है

APARNA IYER & RAVINDRA SONAVANE

पहली तिमाही में कंपनियों के नतीजे एक ऐसे ग्लास को रूप में रह सकते हैं जो आधा भरा होने के साथ ही आधा खाली भी होगा। दूसरे शब्दों में कहें तो वित्त वर्ष 2022-23 की पहली तिमाही के नतीजे मिले-जुले रहने की संभावना है। पिछले साल के छोटे बेस के कारण नेट प्रॉफिट के आंकड़ों में बढ़त देखने को मिलेगी। लेकिन उत्पादन लागत में बढ़त के चलते कंपनियों के मार्जिन पर दबाव देखने को मिल सकता है।

महामारी के बाद के दौर के बाद आने वाली अप्रैल-जून की ये तिमाही पहली सामान्य तिमाही होगी जिसमें कोविड-19 के कारण कोई परेशानी आती नहीं दिखी है। हालांकि रूस-यूक्रेन की लड़ाई की वजह से कमोडिटी की कीमतों में हुई बढ़त का असर भारतीय कंपनियों की बैलेंस शीट पर देखने को मिलेगा।


Kotak Institutional Equities के मुताबिक पहली तिमाही में बीएसई 30 इंडेक्स में शामिल कंपनियों के मुनाफे में सालाना आधार पर 23 फीसदी की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है लेकिन तिमाही आधार पर इसमें 10 फीसदी की गिरावट देखने को मिल सकती है। वहीं इस अवधि में निफ्टी कंपनियों के मुनाफे में सालाना आधार पर 27 फीसदी की बढ़त देखने को मिल सकती है लेकिन तिमाही आधार पर 11 फीसदी की गिरावट देखने को मिल सकती है।

पहली तिमाही में फाइनेंशियल, रिटेल, कंज्यूमर ड्यूरेबल, मल्टीप्लेक्स और केमिकल सेक्टर में मुनाफा बढ़ता नजर आ सकता है। वहीं कमोडिटी से जुड़ी कंपनियों के नतीजे मिल जुले रह सकते हैं।

किनके हाथ में रहेगी लीडरशिप

इस समय बैंकिंग सेक्टर बाजार का सबसे पसंदीदा शेयर नजर आ रहा है। एनालिस्ट का मानना है कि बैंकिग और नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनियां के मुनाफे में पहली तिमाही में अच्छी बढ़त देखने को मिल सकती है।

मोतीलाल ओसवाल का कहना है कि उसके कवरेज में शामिल बैंकिंग शेयरों के मुनाफे में वित्त वर्ष 2023 की पहली तिमाही में सालाना आधार पर 36 फीसदी की बढ़त देखने को मिल सकती है। फाइनेंशियल के अलावा पहली तिमाही में रिटेल और सर्विस सेक्टर के मुनाफे में भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। कोविड के बाद सामाजिक मेल जोल में बढ़ोतरी, त्योहारी मौसम शादियों के सीजन और स्कूल कॉलेज के खुलने का फायदा इस सेक्टर को मिलेगा।

जेफरीज ने अपने एक नोट में कहा है कि रिटेल फुट प्रिंट में बढ़ोतरी के चलते देवयानी के KFC जैसे QSR (क्वीक सर्विस रेस्टोरेंट में तेजी आएगी) इसके अलावा क्रिकेट के आईपीएल के दौरान डिलीवरी सेल्स का फायदा QSR और Zomato जैसे फूड टेक कंपनियों को मिलेगा।

पहली तिमाही के दौरान सप्लाई से जुड़ी दिक्कतें कम होती नजर आई हैं। इसके अलावा कमोडिटी की कीमतें भी हाल के दिनों में नीचे आई हैं। इसका फायदा ऑटो सेक्टर को मिलता नजर आएगा।

कहां रहेगी कमजोरी

वहीं दूसरी तरफ कुछ सेक्टर ऐसे हैं जिनके नतीजे पहली तिमाही में कमजोर रह सकते हैं। इस तिमाही के दौरान कमोडिटी की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। इससे मेटल, सीमेंट और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों पर निगेटिव असर पड़ा है। मार्च तिमाही में Bloomberg Commodity index में 26 फीसदी की बढ़ोतरी देखने को मिली है जबकि जून तिमाही में इसमे 7 फीसदी की गिरावट आई है। यह इस अवधि में कमोडिटी की कीमतों में हुए उतार-चढ़ाव को दर्शाता है।

ऑयल एंड गैस कंपनियों की बात करें तो घरेलू और अंतराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतों मे बढ़त का फायदा अपस्ट्रीम कंपनियों (ओएनजीसी जैसी कंपनियां जो कच्चे तेल का उत्पादन करती हैं) को मिलेगा। वहीं दूसरी तरफ ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को कच्चे तेल की कीमतों और गैस की कीमतों में बढ़ोतरी से नुकसान होगा।

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अमेरिका में मंदी के आशंका के चलते आईटी कंपनियों पर दबाव बना हुआ है। जिसका निगेटिव असर इनकी पहली तिमाही के नतीजों पर दिखेगा। इसके अलावा एफएमसीजी कंपनियों पर भी कमोडिटी और कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण निगेटिव असर आएगा। वहीं, सीमेंट कंपनियों की अर्निंग में भी सुस्ती देखने को मिल सकती है। एनर्जी की बढ़ती कीमतों और कमजोर रियलाइजेशन का असर नियर टर्म में इनकी आय पर दबाव बनाए रखेगा। वित्त वर्ष 2023 के पहली तिमाही में कंपनियां का प्रदर्शन मिला-जुला रहने की उम्मीद है। ऐसे में एनालिस्ट ने अपनेEPS अनुमान घटा दिए हैं। HDFC Securities का कहना है कि वित्त वर्ष 2023 में EPS अनुमान में और कटौती हो सकती है।

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