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Reliance के Q3 नतीजे में जियो और रिटेल कारोबार की रहेगी गूंज, ब्रोकरेज का ये है कैलकुलेशन

मार्केट कैप के हिसाब से देश की सबसे बड़ी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries) का बेसब्री से इंतजार हो रहा है। अधिकतर एनालिस्ट्स का मानना है कि इसके O2C बिजनेस में जो गिरावट होगी, वह इसके कंज्यूमर सेगमेंट्स जियो (Jio) और रिलायंस रिटेल (Reliance Retail) के मजबूत नतीजे से एडजस्ट हो जाएगी। जानिए ब्रोकरेज का क्या रुझान है और रिलायंस रिटेल और जियो के लिए दिसंबर तिमाही कैसी रह सकती है?

Edited By: Moneycontrol Newsअपडेटेड Jan 17, 2024 पर 10:59 PM
Reliance के Q3 नतीजे में जियो और रिटेल कारोबार की रहेगी गूंज, ब्रोकरेज का ये है कैलकुलेशन
जेपी मॉर्गन के मुताबिक दिसंबर तिमाही के नतीजे कमजोर आने के संकेत हैं लेकिन इसका रिलायंस के EPS पर खास झटका नहीं दिखना चाहिए।

मार्केट कैप के हिसाब से देश की सबसे बड़ी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries) का बेसब्री से इंतजार हो रहा है। अधिकतर एनालिस्ट्स का मानना है कि इसके O2C बिजनेस में जो गिरावट होगी, वह इसके कंज्यूमर सेगमेंट्स जियो (Jio) और रिलायंस रिटेल (Reliance Retail) के मजबूत नतीजे से एडजस्ट हो जाएगी। एनालिस्ट्स के मुताबिक फेस्टिव सीजन में देरी का फायदा रिलायंस रिटेल को मिलेगा तो दिसंबर तिमाही में सब्सक्राइबर्स की संख्या में उछाल से जियो की ग्रोथ को सपोर्ट मिलेगा। इसके ईएंडपी (एक्स्प्लोरेशन एंड प्रोडक्शन) सेगमेंट के EBITDA में सालाना आधार पर उछाल दिख सकती है लेकिन O2C सेगमेंट में रिफाइनिंग मार्जिन में सुस्ती के चलते कमाई नरम हो सकती है।

पहले और अब में कितनी बदली Reliance

जेपी मॉर्गन के मुताबिक रिटेल और टेलीकॉम सेगमेंट में एंट्री से पहले रिलायंस की अर्निंग्स ग्रोथ या तो कैपिटल एक्सपेंडिचर या मार्जिन साइकिल पर निर्भर करती थी। उस समय कैपेक्स साइकिल का असर शेयरों पर भी दिखता था। आमतौर पर O2C सेगमेंट की कमाई कच्चे तेल की कीमतों और रिफाइनिंग मार्जिन की अनिश्चितता से प्रभावित होती है। अनुमान से अधिक समय तक चलने वाली रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल परियोजनाओं में देरी से भी रिलायंस के वॉल्यूम और कमाई दोनों पर असर पड़ सकता है। हालांकि अब वोलैटिलिटी कम हो गई है क्योंकि रिलायंस रिटेल और जियो की रिलायंस को कुल EBITDA में करीब 50 फीसदी हिस्सेदारी है। जेपी मॉर्गन का अनुमान है कि अगले तीन वर्षों में इनकी हिस्सेदारी बढ़कर 95 फीसदी पर पहुंच जाएगी।

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