Wipro Results: दिग्गज आईटी कंपनी विप्रो (Wipro) के कर्मचारियों की संख्या मार्च तिमाही में 6,180 घट गई। यह लगातार छठवीं तिमाही है, जब विप्रो के कर्मचारियों की संख्या में गिरावट आई है। वहीं सालाना आधार पर, वित्त वर्ष 2024 में विप्रो के कर्मचारियों की संख्या 24,516 कम हो गई। मार्च तिमाही के अंत में विप्रो के कुल कर्मचारियों की संख्या, 2,34,054 थी। यह गिरावट ऐसे समय में आई है, जब आईटी कंपनियां अपने मार्जिन को बढ़ाने के लिए कर्मचारियों के यूटिलाइजेशन को बेहतर बनाने और एट्रिशन रेट को कम करने पर जोर दे रही है। विप्रो का एट्रिशन रेट तिमाही आधार पर 14.2 फीसदी के सपाट रहा। बता दें कि कर्मचारियों के खुद से इस्तीफा देकर कंपनी छोड़ने की दर को एट्रिशन रेट कहते हैं।
इससे पहले इंफोसिस और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) जैसी इसकी प्रतिद्वंदी कंपनियों में यही ट्रेंड देखने को मिला था। TCS के कर्मचारियों की संख्या वित्त वर्ष 2024 में 13,249 घट गई। वहीं इंफोसिस के कर्मचारियों की संख्या में 25,994 की गिरावट आई। तिमाही आधार पर TCS के 1,759 कर्मचारी कम हुए। वहीं इंफोसिस ने 5,423 कर्मचारी खोए।
हालांकि विप्रो को इसके अलावा वित्त वर्ष 2024 में कुछ और भी चुनौतियां का सामना करना पड़ा। इसके टॉप मैनेजमेंट के 10 प्रतिशत से अधिक कर्मचारियों ने सिर्फ 2023 में कंपनी छोड़ दी। इसमें कंपनी के चीफ ग्रोथ ऑफिसर स्टेफनी ट्रौटमैन, चीफ फाइनेंस ऑफिसर जतिन दलाल, चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर संजीव सिंह, अमेरिका-2 बिजनेस के चीफ बिजनेस ऑफिसर नितिन वी जगनमोहन आदि शामिल हैं।
यहां तक इसके सीईओ थिएरी डेलापोर्टे ने भी हाल ही में कंपनी से अचनाक इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया। विप्रो ने इनकी जगह श्रीनिवास पल्लिया को कंपनी का नया सीईओ और एमडी नियुक्त किया है।
Wipro के मुनाफे में 8% की गिरावट
इस बीच विप्रो का मुनाफा मार्च तिमाही में 8% की गिरावट के साथ 2,835 करोड़ रुपये रहा। पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में कंपनी का प्रॉफिट 3,074.5 करोड़ रुपये था। कंपनी का रेवेन्यू भी मार्च तिमाही में घटकर 22,208.3 करोड़ रुपये हो गया, जो एक साल पहले इसी अवधि में 23,190.3 करोड़ रुपये था। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज पर 19 अप्रैल को विप्रो का शेयर 1.74% की बढ़त के साथ 452.1 रुपये के भाव पर बंद हुआ।