भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने 4 अप्रैल को आदेश दिया कि फूड एग्रीगेटर्स Swiggy और Zomato के खिलाफ लग रहे पेमेंट साइकिल में देरी, एकतरफा क्लॉज और बेहद कमीशन लगाने जैसे आरोपों की "एक जांच होनी जरूरी है।" निष्पक्ष ट्रेड रेगुलेटर ने अपने महानिदेशक को आरोपों की गहन जांच करने और 60 दिनों के भीतर एक रिपोर्ट देने को कहा है।
CCI ने कहा, "आयोग का मानना है कि Zomato और Swiggy के कुछ आचरण के संबंध में एक शुरुआती तौर पर मामला मौजूद है, जिसके लिए महानिदेशक (DG) की तरफ से जांच की जरूरत है। ताकि यह तय किया जा सके कि क्या प्लेटफार्मों के क्या प्लेटफार्मों के संचालन के कारण प्रावधानों का उल्लंघन हुआ है या नहीं।"
यह आदेश नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) की तरफ से दायर शिकायत पर जारी किया गया था, जो देश भर में 50,000 से ज्यादा रेस्टोरेंट ऑपरेटरों का प्रतिनिधित्व करता है।
एसोसिएशन ने पिछले साल जुलाई में एंटीट्रस्ट बॉडी से संपर्क किया था, जिसमें Zomato और Swiggy के खिलाफ डेटा मास्किंग, डीप डिस्काउंटिंग और प्लेटफॉर्म न्यूट्रैलिटी के उल्लंघन के आरोपों की जांच की मांग की गई थी।
दावा किया गया था, "Covid-19 महामारी के दौरान, Zomato और Swiggy की प्रतिस्पर्धा-विरोधी प्रथाओं को लेकर चिंताएं कई गुना बढ़ गई हैं और उनके साथ कई चर्चाओं के बावजूद, ये डीप फंडेड मार्केट प्लेस प्लेटफॉर्म रेस्टोरेंट की चिंताओं को कम करने में रुचि नहीं रखते हैं।
NRAI ने आरोप लगाया कि रेस्टोरेंट से जो कमीशन लिया जाता है वो "अव्यवहार्य" है और "यह 20 प्रतिशत से 30 प्रतिशत तक है, जो बहुत ज्यादा है।"
Zomato पर अपने प्लेटफॉर्म पर लिस्टिड रेस्टोरेंट से ऑर्डर वैल्यू का लगभग 27.8 प्रतिशत चार्ज करने का आरोप लगाया गया था। शिकायतकर्ता ने दावा किया था कि क्लाउड किचन के लिए कमीशन की दर 37 प्रतिशत तक है।