इंडसइंड बैंक ने मंगलवार को बताया कि उसे डेरिवेटिव गड़बड़ी के मामले में एक्सटर्नल ऑडिट की रिपोर्ट मिल गई है। इसके मुताबिक, डेरिवेटिव से जुड़ी गड़बड़ियों के कारण बैंक की नेट वर्थ पर ₹1,979 करोड़ यानी करीब 2.27% का नकारात्मक असर पड़ा है।
इंडसइंड बैंक ने मंगलवार को बताया कि उसे डेरिवेटिव गड़बड़ी के मामले में एक्सटर्नल ऑडिट की रिपोर्ट मिल गई है। इसके मुताबिक, डेरिवेटिव से जुड़ी गड़बड़ियों के कारण बैंक की नेट वर्थ पर ₹1,979 करोड़ यानी करीब 2.27% का नकारात्मक असर पड़ा है।
बैंक ने कहा कि इस गड़बड़ी का असर FY25 की फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स में दिखेगा। पिछले महीने, बैंक ने अपनी डेरिवेटिव पोर्टफोलियो में पाई गई गड़बड़ियों की जांच के लिए एक स्वतंत्र एजेंसी को नियुक्त किया था।
इंटरनल ऑडिट भी हुआ था
बैंक के अनुसार, इंटरनल ऑडिट में नेगेटिव असर को 2.35% आंका गया था, जबकि एक्सटर्नल एजेंसी ने इसे 2.27% बताया है। बैंक ने कहा, '10 मार्च 2025 को हमने यह खुलासा किया था कि डेरिवेटिव पोर्टफोलियो के कुछ खातों में गड़बड़ियां पाई गई थीं।'
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने हाल ही में कहा था कि इंडसइंड बैंक की गड़बड़ी बैंकिंग सिस्टम की नाकामी नहीं है। यह कभी-कभार होने वाली घटना है। । उन्होंने कहा, "देश की बैंकिंग प्रणाली सुरक्षित है, और ऐसी घटनाएं कभी-कभी होती हैं।"
इंडसइंड बैंक के शेयर मंगलवार (15 अप्रैल) नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर ₹735.50 पर बंद हुए। पिछले महीने 12 मार्च को यह शेयर ₹606 के 52-सप्ताह के निचले स्तर तक गिर गया था, लेकिन अब उससे रिकवर कर चुका है।
इंडसइंड बैंक का इतिहास और पहचान
इंडसइंड बैंक देश के प्रमुख प्राइवेट सेक्टर बैंकों में से एक है। यह बैंक कॉरपोरेट, रिटेल, इन्वेस्टमेंट बैंकिंग और कैपिटल मार्केट से जुड़े कामों में सक्रिय भूमिका निभाता है। इसका नाम सिंधु घाटी सभ्यता (Indus Valley Civilization) से प्रेरित होकर रखा गया था।
17 अप्रैल 1994 को इस बैंक ने अपना परिचालन शुरू किया था। निजी क्षेत्र में शुरुआती सफलता के बाद इंडसइंड बैंक ने शेयर बाजार में IPO के जरिए अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई।
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