NCLAT का Zee और Sony के विलय पर रोक लगाने से इनकार, अगली सुनवाई 8 जनवरी को

Axis Finance और IDBI Bank ने इस विलय को एनसीएलएटी में चुनौती दी थी। इस मामले में ट्राइब्यूनल ने ZEEL से जवाब मांगा है। इससे पहले 31 अक्टूबर को हुई मामले की पिछली सुवनाई में एनसीएलएटी ने इस मामले को जस्टिस अशोक भूषण वाली बेंच को ट्रांसफर कर दिया था

अपडेटेड Dec 15, 2023 पर 1:36 PM
12 अक्टूबर को हुई सुनवाई में ZEEL के वकील मुकुल रोहतगी और अरुण कठपलिया ने इस मामले में कोई आदेश जारी नहीं करने की गुजारिश ट्राइब्यूनल से की थी।
     
     
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    नेशनल कंपनी लॉ अपेलेट ट्राइब्यूनल (NCLAT) 15 दिसंबर को ZEEL और Sony के विलय पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। हालांकि, उसने इस मामले में नोटिस जारी किया है। उसने कहा है कि इस मामले की अगली सुनवाई 8 जनवरी को होगी। Axis Finance और IDBI Bank ने इस विलय को एनसीएलएटी में चुनौती दी थी। इस मामले में ट्राइब्यूनल ने ZEEL से जवाब मांगा है। इस खबर के बाद Zee के शेयरों में उछाल दिखा। 1:27 बजे कंपनी का शेयर 1.66 फीसदी चढ़कर 282.50 रुपये था।

    अंतिम बार 31 अक्टूबर को हुई थी सुनवाई

    इससे पहले 31 अक्टूबर को हुई मामले की पिछली सुनवाई में एनसीएलएटी ने इस मामले को जस्टिस अशोक भूषण वाली बेंच को ट्रांसफर कर दिया था। 12 अक्टूबर को हुई सुनवाई में ZEEL के वकील मुकुल रोहतगी और अरुण कठपलिया ने इस मामले में कोई आदेश जारी नहीं करने की गुजारिश ट्राइब्यूनल से की थी। उनकी दलील थी कि एक्सिस फाइनेंस को इस मामले में याचिक दाखिल करने का अधिकार नहीं है।


    ZEEL और Sony के विलय से 10 अरब डॉलर की कंपनी बनेगी

    NCLAT ने 10 अगस्त को Zee Entertainment और Sony Pictures Networks India के विलय को मंजूरी दे दी थी। इससे विलय के बाद देश में 10 अरब डॉलर की मीडिया कंपनी बनने का रास्ता साफ हो गया था। इससे पहले NCLT की एचवी सुब्बा राव और मधु सिन्हा की बेंच ने विलय के प्रस्ताव पर कुछ कंपनियों के आपत्ति जताने पर अपना फैसला सुरक्षित कर लिया था। इन कंपनियों में Axis Finance, JC Flower Asset Reconstruction Co, IDBI Bank, Imax Corp और IDBI Trusteeship शामिल थीं।

    विलय योजना पर 2021 में हुआ था समझौता

    Sony और ZEEL ने दिसंबर 2021 में विलय के समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। विलय के बाद बनने वाली कंपनी में सोनी की अप्रत्यक्ष रूप से सबसे ज्यादा 50.86 फीसदी हिस्सेदारी होगी। जी के फाउंडर्स की कंपनी में 3.99 फीसदी हिस्सेदारी होगी। जी के शेयरधारकों की 45.15 फीसदी हिस्सेदारी होगी। पहले विलय की पक्रिया के 8-10 महीनों में पूरी होने की उम्मीद जताई गई थी। लेकिन, अब तक विलय की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। इसकी वजह यह है कि जी को कर्ज देने वाले कई बैंकों और वित्तीय संस्थानों ने इस विलय के खिलाफ याचिका दाखिल की हैं।

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