यूनियन बैंक ने 19 मई को श्रेई इक्विपमेंट फाइनेंस (Srei Equipment Finance) और श्रेई इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस (Srei Infrastructure Finance) के खातों को फ्रॉड कैटेगरी में डाल दिया है। इन दोनों कंपनियों पर फंड के डायवर्जन का आरोप है।

यूनियन बैंक ने 19 मई को श्रेई इक्विपमेंट फाइनेंस (Srei Equipment Finance) और श्रेई इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस (Srei Infrastructure Finance) के खातों को फ्रॉड कैटेगरी में डाल दिया है। इन दोनों कंपनियों पर फंड के डायवर्जन का आरोप है।
यूनियन बैंक ने एक्सचेंज को दी गई जानकारी में बताया कि आने वाले समय में वह कंपनी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू करेगा।
RBI ने 4 अक्टूबर 2021 को गवर्नेंस इश्यू और पेमेंट में देरी को आधार बनाते हुए Srei Infrastructure Finance Ltd (SIFL) और Srei Equipment Finance के टेकओवर का ऐलान किया था। RBI ने बैंक ऑफ बड़ौदा के पूर्व मुख्य जनरल मैनेजर रजनीश शर्मा को इस मामले में एडमिनिस्ट्रेटर नियुक्त किया है।
11 अक्टूबर को रजनीश शर्मा ने एक पब्लिक नोटिस जारी करके Srei Infrastructure Finance के लेनदारों को क्लेम करने को कहा है। इससे पहले नेशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल (NCLT) के कोलकाता बेंच ने 8 अक्टूबर को आदेश दिया था कि श्रेई ग्रुप की कंपनियों के खिलाफ कॉरपोरेट इनसॉल्वेंसी की प्रक्रिया शुरू की जाए।
श्रेई के बुरे दौर की शुरुआत 2018 में तब हुई जब श्रेई इंफ्रास्ट्रक्चर लीजिंग एवं फाइनेंस कंपनी धराशायी हो गई। इसकी वजह से कैश की किल्लत हुई और इसका असर सभी NBFC पर पड़ा। बैंकों ने ऐसी सभी संस्थाओं को कर्ज देना बंद कर दिया। इसके बाद श्रेई इंफ्रास्ट्रक्चर लीजिंग एवं फाइनेंस को अपने IPO की योजना टालनी पड़ी। नकदी के इस संकट में फंसने के बाद ग्रुप कभी इससे उबर नहीं पाया।
जुलाई 2019 में, Srei Infrastructure Finance (SIFL) के बोर्ड ने लेंडिंग बिजनेस Srei Equipment Finance (SEFL) को देने का फैसला किया था। कंपनी के इस कदम का मकसद बैंकिंग लाइसेंस लेना था। SIFL ने स्टॉक एक्सचेंज को दी गई जानकारी में बताया था कि इस इकाई को एक बैंक बनाने की तैयारी थी।
हालांकि श्रेई के लेनदारों को इसकी कोई जानकारी नहीं थी और ना ही उन्हें भरोसे में लिया गया था। कंपनी को लोन देने वाले बैंकों में यूको बैंक, एक्सिस बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया शामिल थे।
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