Ayodhya: 'कुछ मिनटों में 2 करोड़ रुपए की जमीन हुई 18.5 करोड़ की', राम मंदिर ट्रस्ट पर AAP, SP के गंभीर आरोप

AAP और समाजवादी पार्टी ने इस साल 18 मार्च को राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पर जमीन खरीद में धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार का आरोप लगाया
अपडेटेड Jun 14, 2021 पर 15:18  |  स्रोत : Moneycontrol.com

रविवार को जब प्रधानमंत्री के पूर्व प्रधान सचिव और अब राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की मंदिर निर्माण समिति के प्रमुख नृपेंद्र मिश्रा ने अयोध्या (Ayodhya) में राम मंदिर (Ram Mandir) के कार्यों का जायजा लेने के लिए ट्रस्टियों और विशेषज्ञों से मुलाकात की, तब समाजवादी पार्टी (SP) और आम आदमी पार्टी (AAP) ने इस साल 18 मार्च को ट्रस्ट द्वारा जमीन के एक टुकड़े की खरीद में धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार का आरोप लगाया।


लखनऊ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में AAP के UP प्रभारी और सांसद संजय सिंह ने कहा, "अयोध्या में जमीन का एक टुकड़ा 243, 244 और 246 नंबर के साथ रजिस्टर्ड है। इसकी कीमत 5.80 करोड़ रुपए है। इसे कुसुम पाठक और हरीश पाठक से सुल्तान अंसारी और रवि मोहन तिवारी ने 2 करोड़ रुपए में खरीदा था। इस खरीद के दो गवाह थे- राम जन्मभूमि ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा और अयोध्या के मेयर ऋषिकेश उपाध्याय।"


उन्होंने आगे कहा, "इसे शाम 7.10 बजे खरीदा गया। अगले पांच मिनट में वही जमीन राम जन्मभूमि ट्रस्ट और चंपत राय ने अंसारी और तिवारी से 18.5 करोड़ रुपए में खरीद ली और RTGS के जरिए 17 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए गए।"


देर रात जारी एक बयान में, ट्रस्ट ने कहा, मौजूदा विक्रेताओं के पास सालों पहले एक कीमत पर एक रजिस्टर्ड समझौता था और 18 मार्च को बैनामा (Sale Deed) के बाद, उन्होंने इसे ट्रस्ट को बेच दिया।


बयान में कहा गया, "सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद, बहुत सारे लोग जमीन खरीदने के लिए अयोध्या आने लगे और UP सरकार भी विकास कार्यों के लिए बहुत सारी जमीन खरीद रही है, जिससे जमीन की कीमत अचानक बढ़ गई। जिस जमीन पर चर्चा शुरू हुई है वह रेलवे स्टेशन के बहुत करीब है और इसलिए बहुत महत्वपूर्ण स्थान पर है। ट्रस्ट द्वारा खरीदी गई सभी जमीन बाजार मूल्य से काफी कम कीमत पर खरीदी जाती है।"


संजय सिंह ने दावा किया कि पहली खरीद के लिए स्टांप पेपर शाम 5.11 बजे और दूसरे के लिए शाम 5.22 बजे खरीदे गए। उन्होंने मांग की कि इसकी CBI या ED द्वारा जांच की जाए, क्योंकि ये करोड़ों लोगों की धार्मिक मान्यताओं से जुड़ा मामला है।ॉ


वहीं अयोध्या में एक दूसरी प्रेस कॉन्फ्रेंस में समाजवादी पार्टी के नेता और पूर्व विधायक पवन पांडेय ने भी ऐसे ही सवाल उठाए। उन्होंने कहा, "जमीन का एक टुकड़ा 2 करोड़ रुपये में खरीदा गया था, जिसमें ट्रस्टी गवाह थे। क्या जमीन ने सोना देना शुरू कर दिया कि कुछ मिनट बाद वही जमीन 18.5 करोड़ रुपए में खरीदी गई?… मेयर ऋषिकेश उपाध्याय के साथ ट्रस्टी गवाह हैं। मेरे पास दस्तावेजी सबूत है।"


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हालांकि, ट्रस्ट ने कहा कि इस मुद्दे पर राजनीतिक लोगों द्वारा किया जा रहा दुष्प्रचार भ्रामक है। ये कहा, “संबंधित व्यक्ति राजनीतिक है और मामला राजनीति से प्रेरित है।"


बयान में ये भी दावा किया गया है कि सभी बिक्री और खरीद सही बातचीत और समझौते द्वारा की जाती है और एग्रीमेंट के पेपर्स पर साइन किए जाते हैं। इसमें कहा, "सभी अदालती शुल्क और स्टांप पेपर की खरीद ऑनलाइन की जाती है और पैसा ऑनलाइन लेनदेन के जरिए विक्रेता के बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिया जाता है।"


इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, वहीं ट्रस्ट को जमीन का टुकड़ा बेचने वाले दो संपत्ति डीलरों में से एक, अंसारी इस मामले पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। तिवारी ने कहा कि इस जमीन के लिए कई साल पहले पाठकों के साथ दो करोड़ रुपए का समझौता हुआ था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद इसकी कीमत काफी बढ़ गई।


तिवारी ने कहा, "जबकि मैंने इसे अपने समझौते के अनुसार 2 करोड़ रुपए में खरीदा था, वास्तविक कीमत अभी 20 करोड़ रुपए से ज्यादा होनी चाहिए, लेकिन मैंने इसे सिर्फ 18.5 करोड़ रुपए में बेचा, क्योंकि ये हमारे विश्वास से संबंधित एक परियोजना के लिए है।"


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