उत्तराखंड (Uttarakhand) के पिथौरागढ़ में बुधवार को दर्जनों शव सरयू नदी (Sarayu River) के तट पर बहते हुए मिले। आशंका है कि ये शव Covid-19 पीड़ितों के हो सकते हैं, जिससे स्थानीय लोगों में डर, गुस्सा और चिंता पैदा हो गई है। स्थानीय लोगों को डर है कि पानी दूषित हो जाएगा, जिससे Covid-19 बीमारी तेजी से फैल जाएगी, क्योंकि जहां ये लाशें तैरती मिली हैं, वहां से केवल 30 किलोमीटर दूर जिला मुख्यालय है, जिसे नदी से पीने के पानी की सप्लाई मिलती है।
कई लोग COVID-19 के प्रसार को लेकर चिंतित हैं, क्योंकि इस महीने की शुरुआत में मामले अब तक के हाई लेवल पर थे। स्थानीय लोगों ने कोरोना पीड़ितों के शवों का खुले में अंतिम संस्कार करने पर भी आपत्ति जताई, क्योंकि उन्हें संक्रमण के और फैलने का डर है।
घाट में कोरोना के मरीजों के दाह संस्कार की निगरानी कर रहे जिले के तहसीलदार पंकज चंदोला ने कहा कि सरयू नदी में बहने वाले शव पिथौरागढ़ के नहीं हैं। चंदोला ने कहा, "जिस इलाके में लाशें तैर रही थीं, वह पिथौरागढ़ का नहीं है। अभी तक इनकी शिनाख्त नहीं हो पाई है और शव कहां से आए इसकी जांच की जा रही है।"
इसी तरह की घटना इस महीने की शुरुआत में बिहार और उत्तर प्रदेश में भी देखने को मिली थीं, जहां गंगा नदी में शव तैरते पाए गए थे।
इस बीच, केंद्र ने उत्तर प्रदेश और बिहार से गंगा और उसकी सहायक नदियों में शवों को बहाने पर रोकने के लिए कहा है, जिसमें COVID-19 पीड़ितों के शवों को नदियों में फेंके जाने की मीडिया रिपोर्टों को “अवांछनीय और खतरनाक” बताया गया है।