Bitcoin का किसने किया अविष्कार? मियामी में चल रहे इस मुकदमे से खुल सकता है Satoshi Nakamoto के नाम का राज

मियामी में क्रेग राइट बनाम इरा क्लेमन का मुकदमा शुरू हो चुका है

अपडेटेड Nov 03, 2021 पर 9:04 AM
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अमेरिका के मियामी शहर की एक अदालत में क्रेग राइट बनाम इरा क्लेमन (raig Wright vs Ira Kleiman) के शुरू हुए मुकदमे पर दुनिया भर के बिटकॉइन प्रेमियों की नजरें टिकी हुई हैं। इस मुकदमे के दौरान शायद बिटकॉइन (Bitcoin) की दुनिया के सबसे बड़े रहस्यों में से एक का पर्दा उठ सकता है कि आखिरी बिटकॉइन को बनाने वाले सतोशी नाकामोतो (Satoshi Nakamoto) असल दुनिया में कौन है और उनके पास जमा करीब 11 लाख बिटकॉइन का क्या हुआ?

क्रेग राइट एक ऑस्ट्रेलियाई कंप्यूटर साइंटिस्ट है और वह करीब 2016 से दावा कर रहे हैं उन्होंने ही सतोशी नाकामोतो के छद्म नाम से बिटकॉइन को बनाया था। हालांकि मुकदमे में दावा किया गया है कि क्रेग राइट ने ऐसा अकेला नहीं किया था। इरा क्लेमन के मुताबिक, उनके दिवंगत भाई डेविड क्लेमन बिटकॉइन को-क्रिएटर थे और सातोशी नाकामोतो के नाम से पड़े 66 अरब डॉलर के बिटकॉइन में से वह आधे हिस्से के हकदार हैं। डेविड क्लेमन एक कंप्यूटर एक्सपर्ट थे और वह क्रेग राइट के लंबे समय तक दोस्त रहे थे, जिनकी मौत 2013 में हुई थी।

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मुकदमे में दावा किया गया है कि डेविड क्लेमन और राइट ने एक साझेदारी के तहत W&K इंफो डिफेंस रिसर्च, एलएलसी नाम से एक कंपनी की स्थापना की, जिसका इस्तेमाल वे बिटकॉइन को माइन करने और बिटकॉइन सोर्स कोड सहित अपनी इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी को व्यवस्थित करने के लिए करते थे।

इरा क्लेमन का कहना ​​है कि उनका भाई सतोशी के खजाने में जितने बिटकॉइन है उन सभी को उनके भाई ने अकेले माइन किया था। उन्होंने दावा किया कि डेविड की मृत्यु के बाद राइट ने जालसाजी और छल के जरिए उन्हें ठगने का प्रयास किया। राइट ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि डेविड क्लेमन उनके करीबी मित्र जरूर थे, लेकिन दोनों कभी भी किसी बिजनेस में पार्टनर नहीं थे और वह अकेले ही सतोशी नाकामोतो हैं।

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क्रेग राइट बनाम इरा क्लेमन मुकदमे के लिए सोमवार को 10 जूरी सदस्यों का एक पैनल चुना गया। इस पैनल के पास सभी सबूतों को सुनने और सतोशी की पहचान निर्धारित करने के लिए तीन सप्ताह का समय होगा।

हालांकि क्रिप्टोकरेंसी की दुनिया के कुछ दिग्गज आंत्रप्रेन्योर्स और इनवेस्टर्स, क्रेग राइट के दावे को फर्जीवाड़ा के तौर पर देखते हैं। उनका मानना है कि सतोशी का गुमनाम रहना बिटकॉइन के लिए जीनियस प्लान में से एक था। इससे दूसरे लोगों को इस फील्ड में आकर इनोवेशन करने की प्रेरणा मिली और साथ ही वह दुनिया के तमाम देशों के वित्तीय सिस्टम को नाराज करने के बावजूद जांच और ट्रायल से बचे रहे। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई मुख्यरूप से सतोशी के नाम से पड़े 66 अरब डॉलर के बिटकॉइन को पाने की लग रही है। हालांकि कोर्ट का फैसला किसी एक के पक्ष में आने के बाद भी इस बात की गारंटी नहीं है कि उन बिटकॉइन को दोबारा हासिल किया जा सकेगा।

क्रेग राइट अपने तमाम दावों के बावजूद कभी सार्वजनिक रूप से यह साबित नहीं कर पाए हैं कि वह ही सचमुच में सतोशी नाकामोतो हैं। मई 2016 में खुद को सतोशी नाकामोतो बताने के बाद उन्होंने दावा किया था वह सतोशी के खाते में से कुछ बिटकॉइन को ट्रांसफर करके पूरी दुनिया को बता देंगे कि उनके पास सातोशी की प्राइवेट की है और वह ही असली सातोशी हैं। हालांकि वह कभी ऐसा नहीं कर पाए। बाद में उन्होंने सफाई दिया कि बिटकॉइन फैंस की भावनाओं को ख्याल रखते हुए उन्होंने सतोशी के खाते से बिटकॉइन नहीं ट्रांसफर किया।

इस बीच क्रेग राइट ने अपने कई विरोधियों पर मानहानि का दावा भी किया, जिन्होंने उनके दावे को नकारते हुए उन्हें एक ढोंगी करार दिया था।

वैसे यह भी ध्यान दिला दें कि मियामी में चल रहा मुकदमा मूल रूप से यह तय करने के लिए नहीं है कि क्रेग राइट ही असली सतोशी नाकामोतो हैं या नहीं। बल्कि यह मुकदमा यह तय करने के लिए है कि क्रेग राइट और दिवंगत डेविड क्लेमन के बीच में कोई पार्टनरशिप थी या नहीं। हालांकि क्रिप्टोप्रेमियों की नजरें इस मुकदमें पर इसलिए टिकीं है क्योंकि सुनवाई के दौरान बार-बार सतोशी नाकामोतो का जिक्र आने वाला है, ऐसे में जूरी पैनल जरूरी समझने पर सतोशी नाकामोतो की पहचान पर भी फैसला सुना सकता है।

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