Operation Sindoor: पिछले साल आज के दिन भारत और पाकिस्तान के बीच एक अघोषित जंग जारी थी। कश्मीर के पहलगाम में हुए दर्दनाक आतंकी अटैक के बाद भारतीय सेना पाकिस्तान में छुपे आतंकियों को चुन-चुन कर मार रही थी। इसी के तहत 6-7 मई की रात को पाकिस्तान में एक बेहद खतरनाक मिशन को अंजाम दिया गया। इसे ऑपरेशन सिंदूर का नाम दिया गया जिसके तहत करीब 10 से ज्यादा ठिकानों पर सटीक हमलों में सैकड़ों आतंकियों को मौत की नींद सुला दी गई।
ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ से ठीक पहले, दुनिया के जाने-माने अमेरिकी सैन्य विशेषज्ञ जॉन स्पेंसर ने इस संघर्ष का एक गहन विश्लेषण साझा किया है। स्पेंसर के मुताबिक, हालांकि शुरुआती कुछ घंटों में पाकिस्तान को कुछ 'टैक्टिकल' बढ़त जरूर मिली थी, लेकिन रणनीतिक रूप से भारत इस संघर्ष में विजेता बनकर उभरा। स्पेंसर का दावा है कि युद्ध शुरू होने के चौथे दिन तक भारत ने आसमान में पूर्ण वर्चस्व हासिल कर लिया था, जिससे पाकिस्तान अपने ऑपरेशंस जारी रखने में पूरी तरह असमर्थ हो गया था।
जब भारत ने तोड़ी पाकिस्तान की कमर
जॉन स्पेंसर अमेरिकी सेना के पूर्व मेजर रह चुके हैं और वर्तमान में मैडिसन पॉलिसी फोरम में युद्ध अध्ययन के चेयर हैं। उन्होंने बताया कि भारत की यह जीत किसी एक हमले का नतीजा नहीं थी। यह एक सोची-समझी रणनीति थी, जिसके तहत कई दिनों तक पाकिस्तान के एयर डिफेंस सिस्टम (AD) को तबाह किया गया।
सर्जिकल स्ट्राइक: भारत ने 6-7 मई की दरम्यानी रात पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (POJK) में आतंकी ठिकानों पर हमला किया।
जवाबी कार्रवाई: जब पाकिस्तान ने भारतीय शहरों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, तो भारत ने और अधिक आक्रामक रुख अपनाते हुए पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों पर स्ट्राइक की।
सीजफायर: चार दिनों तक चले इस संघर्ष का अंत 10 मई को पाकिस्तान के अनुरोध पर हुए युद्धविराम के साथ हुआ।
पाकिस्तान क्यों नहीं दे पाया जवाब?
स्पेंसर के अनुसार, आधुनिक युद्ध केवल विमान बनाम विमान की लड़ाई नहीं है, बल्कि यह लेटेस्ट तकनीकों का युद्ध है। भारत ने इस युद्ध में पाकिस्तान की 'देखने, समन्वय करने और प्रतिक्रिया देने' की क्षमता को खत्म कर दिया था।
पाकिस्तानी एयर डिफेंस पर प्रहार: 8 मई को भारत ने चूनियां और पसरूर में पाकिस्तान के अर्ली-वार्निंग रडार और कम से कम एक HQ-9 लॉन्ग-रेंज मिसाइल बैटरी को निशाना बनाया।
लोइटरिंग मुनिशन्स का इस्तेमाल: 9 मई को भारत ने रडार कवरेज और मिसाइल सिस्टम पर दबाव बनाए रखने के लिए मुख्य रूप से आत्मघाती ड्रोन का उपयोग किया।
S-400 का खौफ: भारत के S-400 सिस्टम ने लगभग 300 किलोमीटर की दूरी से एक हाई-वैल्यू पाकिस्तानी विमान को इंगेज किया, जिसने पाकिस्तानी वायु सेना को अपनी ऑपरेशन सीमाएं बदलने पर मजबूर कर दिया।
शुरुआती झटकों के बाद भारत ने पलटी बाजी
स्विस थिंक टैंक 'सेंटर डी हिस्टोयर एट डी प्रॉस्पेक्टिव मिलिटेयर्स' (CHPM) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए स्पेंसर ने माना कि शुरुआत में भारत ने अपने तीन विमान खोए थे। पाकिस्तान ने इस शुरुआती सफलता को अपनी जीत के रूप में पेश किया, लेकिन वह इसे बरकरार नहीं रख सका।
पाकिस्तान ने भारत की सफलता को दोहराने के लिए सैकड़ों ड्रोन, CM-400AKG मिसाइलें और फतह व हत्फ रॉकेट दागे, लेकिन भारत के 'इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस नेटवर्क' के सामने वे विफल रहे। भारत ने पाकिस्तानी हमलों को नाकाम करने के लिए स्वदेशी तकनीक 'आकाशतीर' का प्रभावी ढंग से उपयोग किया।