न बच सकने वाले मरीजों से सिर्फ 4 शर्तों पर ही हट सकता है लाइफ सपोर्ट सिस्टम, सरकार लाई नई गाइडलाइंस

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी की गईं ड्राफ्ट गाइडलाइंस में मस्तिष्क को गंभीर आघात, जो 72 घंटे या उससे अधिक समय के बाद भी ठीक नहीं होता, को भी लाइलाज स्थिति में शामिल किया गया है। गाइडलाइंस पर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. आर.वी. अशोकन ने कहा कि यह डॉक्टर्स को कानूनी जांच के दायरे में लाता है और उनमें तनाव पैदा करता है

अपडेटेड Sep 29, 2024 पर 2:20 PM
  • Follow Us On Google
  • Add as a Preferred Source on Google
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने ड्राफ्ट पर स्टेकहोल्डर्स से 20 अक्टूबर तक प्रतिक्रिया और सुझाव मांगे हैं।

डॉक्टर्स को असाध्य रोग से पीड़ित मरीजों यानि कि जिनके बचने की कोई उम्मीद नहीं है (Terminally Ill), ऐसे मरीजों से जीवन रक्षक प्रणाली (Life Support System) हटाने को लेकर कुछ खास शर्तों के आधार पर सोच-समझकर फैसला लेना चाहिए। इन शर्तों में मरीज या उनके परिवार वालों की ओर से लिखित रूप में किया गया इनकार भी शामिल है। यह बात केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ड्राफ्ट गाइडलाइंस में कही गई है।

गाइडलाइंस में ‘पैसिव यूथेंसिया’ (लाइफ सपोर्टिंग उपाय बंद कर मरीज को मरने देने) के लिए 4 शर्तें निर्धारित की गई हैं, जिनके तहत मरीज के लिए 'बेस्ट' के बारे में सोचकर फैसला लिया जा सकता है। किसी असाध्य रोग की स्थिति में ऐसे लाइफ सपोर्ट को रोका या बंद किया जा सकता है, जिससे मरीज को कोई फायदा होने की संभावना नहीं है।

कौन सी हैं 4 शर्तें


'ड्राफ्ट गाइडलाइंस फॉर विदड्रॉल ऑफ लाइफ सपोर्ट इन टर्मिनली इल पेशेंट्स' में कहा गया है कि डॉक्टर्स को असाध्य रूप से बीमार मरीजों के लिए लाइफ सपोर्टिंग उपाय शुरू न करने का फैसला सोच-समझकर लेना चाहिए। ड्राफ्ट गाइडलाइंस में मेंशन 4 शर्तें हैं- क्या व्यक्ति को ‘ब्रेनस्टेम डेथ’ घोषित किया गया है, क्या मेडिकल पूर्वानुमान और सुविचारित राय है कि मरीज की बीमारी एडवांस स्टेज में है और थेरेप्यूटिक हस्तक्षेप से भी फायदा होने की संभावना नहीं है, मेडिकल पूर्वानुमान पता चलने के बाद लाइफ सपोर्ट जारी रखने के लिए मरीज/परिजन की ओर से लिखित में किया गया इनकार, और सुप्रीम कोर्ट की ओर से निर्धारित प्रक्रिया का अनुपालन।

‘ब्रेनस्टेम डेथ’ वह स्थिति है, जब ब्रेनस्टेम (मस्तिष्क का एक हिस्सा) काम करना बंद कर देता है। ऐसा होने पर व्यक्ति कभी भी होश में नहीं आ पाएगा या वेंटिलेटर के बिना सांस नहीं ले पाएगा।

डायबिटीज के लिए रामबाण है कुंदरू, मोटापा रहेगा दूर, पाचन शक्ति करें ठीक

ड्राफ्ट पर 20 अक्टूबर तक मांगा फीडबैक

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने ड्राफ्ट पर स्टेकहोल्डर्स से 20 अक्टूबर तक प्रतिक्रिया और सुझाव मांगे हैं। ड्राफ्ट गाइडलाइंस में घातक बीमारी को ऐसी लाइलाज स्थिति के रूप में परिभाषित किया गया है, जिससे निकट भविष्य में मृत्यु होनी ही होनी हो। मस्तिष्क को गंभीर आघात, जो 72 घंटे या उससे अधिक समय के बाद भी ठीक नहीं होता, उसे भी इसमें शामिल किया गया है। ड्राफ्ट में कहा गया है, ‘‘एक्टिव यूथेंसिया, मरणासन्न अवस्था में किसी रोगी के स्वैच्छिक अनुरोध पर, उसके हित में डॉक्टर के सीधे दखल से इरादतन मरीज के जीवन को खत्म करना है। भारत में यह अवैध है।’’

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।