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Guillain Barre Syndrome: पुणे में फैली गुलियन बैरे सिंड्रोम, 20000 रुपये का लगता है एक इंजेक्शन, जानें लक्षण और बचाव

Guillain Barre Syndrome: महाराष्ट्र के पुणे शहर में इन दिनों गुलियन बैरे सिंड्रोम नाम की बीमारी का कहर जारी है। इस बीमारी की चपेट में अब तक 100 से ज्यादा लोग आ चुके हैं। प्रशासन में हड़कंप मच गया है। सरकार के हाथ पांव फूल गए हैं। राज्य के डिप्टी सीएम ने फ्री में इलाज कराने का ऐलान किया है। जानिए आखिर क्या है यह बीमारी, इसके लक्षण और बचाव

Jitendra Singhअपडेटेड Jan 27, 2025 पर 1:51 PM
Guillain Barre Syndrome: पुणे में फैली गुलियन बैरे सिंड्रोम, 20000 रुपये का लगता है एक इंजेक्शन, जानें लक्षण और बचाव
Guillain Barre Syndrome: गुलियन बैरे सिंड्रोम से पीड़ित मरीज की इम्यूनिटी शरीर के खिलाफ काम करने लगती है।

देश में इन दिनों कई तरह की गंभीर और संक्रामक बीमारियां फैली हुई हैं। पहले एचएमपीवी और फिर एच5एन1 (बर्ड फ्लू) के संक्रमण ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ाई और अब महाराष्ट्र के कई शहरों में गुलियन बैरे सिंड्रोम जीबीएस) के मामले काफी ज्यादा बढ़ गए हैं। राज्य के पुणे शहर में 100 से ज्यादा मरीज इसकी चपेट में आ चुके हैं। जिनमें 17 मरीज वेंटिलेटर पर हैं। केंद्र सरकार ने जांच के लिए एक टीम को पुणे भेज दिया है। राज्य के डिप्टी सीएम अजित पवार ने कहा कि पुणे नगर निगम के कमला नेहरू अस्पताल में GBS के मरीजों का फ्री में इलाज होगा।

राज्य स्वास्थ्य विभाग की ओर से मिली जानकारी के मुताबिक, करीब 19 मरीज 9 साल से कम उम्र के हैं। वहीं 50-80 साल के 23 मामले सामने आए हैं। 9 जनवरी को अस्पताल में भर्ती एक मरीज को पुणे क्लस्टर के भीतर पहला जीबीएस मामला सामने आया था। अस्पताल में भर्ती मरीजों से लिए गए कुछ जैविक नमूनों में कैम्पिलोबैक्टर जेजुनी बैक्टीरिया का पता चला है। अधिकारी पुणे के पानी का नमूना ले रहे हैं, खासकर उन इलाकों में जहां मामले सामने आ रहे हैं।

जानिए क्या है गुलियन बेरी सिंड्रोम (GBS)?

गुलियन बेरी सिंड्रोम एक ऐसी बीमारी हैं, जिसमें पीड़ित की इम्युनिटी अपने शरीर के इम्यूनिटी के खिलाफ काम करने लगती है। इसलिए इसे ऑटो इम्यून डिसऑर्डर कहा जाता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक यह बीमारी बैक्टीरीयल या वायरल इंफेक्शन की वजह से होती है। इस बीमारी से पीड़ित मरीजों को कमजोरी के अलावा हाथ और पैरों में झुनझुनी होती है। इसके अलावा शुरुआत में सांस संबंधी बीमारी भी महसूस होती है, लेकिन लंबे समय के बाद शरीर पैरालाइज (लकवाग्रस्त) हो जाता है।

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