रात की दावत के बाद जब सब चैन की नींद सो रहे होते हैं, तभी कुछ लोग करवटें बदलते रहते हैं—कारण? सीने में उठती जलन की लपटें! ये कोई मामूली बात नहीं, बल्कि एसिड रिफ्लक्स की ओर इशारा करती है। जब तैलीय, मसालेदार पकवान पेट में जाकर उथल-पुथल मचाते हैं, तो वहां बनने वाला तेज़ाब ऊपर की ओर, यानी खाने की नली तक पहुंच जाता है। यही शुरू होता है हार्टबर्न का खेल, जो अक्सर रात के वक्त ज्यादा परेशान करता है। अगर इसे नजरअंदाज किया गया, तो यह गैस्ट्रोएसोफेगल रिफ्लक्स डिजीज जैसी बड़ी परेशानी का कारण भी बन सकता है।
खाने के बाद पीठ के बल लेटना, जरूरत से ज्यादा खाना या पेट पर चर्बी का दबाव—ये सब मिलकर इस जलन को और बढ़ा देते हैं। लेकिन घबराइए नहीं। कुछ आसान घरेलू उपायों से इस परेशानी से राहत पाना बिल्कुल मुमकिन है।
क्या है नाइटटाइम हार्टबर्न?
जब पेट का एसिड ऊपर खाने की नली यानी एसोफेगस में चला जाता है, तो उसे एसिड रिफ्लक्स कहते हैं। ये जलन और बेचैनी का कारण बनता है, खासकर तब जब हम पीठ के बल लेटे हों। एक स्टडी के मुताबिक, ऐसे 68% लोग हैं जिन्हें सीने की जलन के चलते नींद में खलल होता है।
1. ज्यादा मसाले वाला खाना
रात को तले-भुने और तीखे खाने से पेट में तेजी से एसिड बनता है, जो जलन को बढ़ा देता है।
नींबू, टमाटर, सिरका जैसी चीजें खाने से एसोफेगस कमजोर होता है और पेट का एसिड ऊपर चढ़ता है।
इस पोजिशन में एसिड सीधा खाने की नली की ओर बढ़ता है, जिससे जलन और उल्टी जैसा महसूस हो सकता है।
जरूरत से ज्यादा खाना पेट को भारी बना देता है, जिससे गैस और जलन की समस्या बढ़ जाती है।
ज्यादा वजन होने पर पेट पर दबाव बढ़ता है, जिससे एसिड ऊपर की ओर धकेला जाता है और रिफ्लक्स की दिक्कत हो सकती है।
हार्टबर्न से राहत के घरेलू उपाय
प्रोबायोटिक दही से पाचन सुधरता है और पेट का एसिड बैलेंस में रहता है।
इसमें मौजूद जिंजरोल सूजन कम करता है और पाचन को ठीक रखने में मदद करता है।
कैफीन-मुक्त ग्रीन टी पेट को शांत करती है और जलन से राहत दिलाती है।
ये शरीर को हाइड्रेट रखता है और एसिड को संतुलित करता है, जिससे सीने की जलन कम होती है।
डिस्क्लेमर: यह लेख सिर्फ सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी तरह से किसी दवा या इलाज का विकल्प नहीं हो सकता। ज्यादा जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से संपर्क करें।