Diabetes का कारण बन सकता है इंसुलिन रेजिस्टेंस, खतरे की घंटी बजते ही हो जाएं अलर्ट

Insulin resistance: इंसुलिन रेजिस्टेंस सिर्फ डायबिटीज ही नहीं, बल्कि कई अन्य बीमारियों की भी जड़ बन सकता है। शरीर में जमा अतिरिक्त चर्बी इसकी बड़ी वजह मानी जाती है, जो इंसुलिन के सामान्य कामकाज में बाधा डालती है। ऐसे में समय रहते इसे पहचानना और नियंत्रित करना जरूरी हो जाता है ताकि गंभीर रोगों से बचाव हो सके

अपडेटेड Apr 14, 2025 पर 6:30 AM
Story continues below Advertisement
Insulin resistance: इंसुलिन एक हार्मोन है जो हमारे खून में मौजूद शुगर (ग्लूकोज) के स्तर को नियंत्रित करता है।

आजकल की तेज रफ्तार और अनियमित जीवनशैली ने लोगों की सेहत पर गहरा असर डाला है। देर रात तक जागना, जंक फूड खाना, तनाव में रहना और शारीरिक गतिविधियों की कमी – ये सब मिलकर कई गंभीर बीमारियों को जन्म दे रहे हैं। इन्हीं में से एक समस्या है ‘इंसुलिन रेजिस्टेंस’ यानी इंसुलिन प्रतिरोध, जो खासतौर पर डायबिटीज के मरीजों में देखने को मिलती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये स्थिति केवल ब्लड शुगर तक सीमित नहीं है, बल्कि ये शरीर में कई और बड़ी बीमारियों की वजह बन सकती है? इंसुलिन एक ऐसा हार्मोन है जो शरीर में ग्लूकोज को कोशिकाओं तक पहुंचाने में मदद करता है।

जब शरीर की कोशिकाएं इस हार्मोन पर ठीक से प्रतिक्रिया नहीं देतीं, तो खून में शुगर का स्तर बढ़ने लगता है और यहीं से शुरू होता है गंभीर समस्याओं का सिलसिला। आइए इस लेख में समझते हैं इंसुलिन रेजिस्टेंस क्या है, इसके कारण, असर और बचाव के उपाय।

इंसुलिन रेजिस्टेंस क्या है?


इंसुलिन एक हार्मोन है जो हमारे खून में मौजूद शुगर (ग्लूकोज) के स्तर को नियंत्रित करता है। जब शरीर की कोशिकाएं इस हार्मोन की प्रतिक्रिया देना बंद कर देती हैं, तो उसे इंसुलिन रेजिस्टेंस कहा जाता है। इसका मतलब ये हुआ कि ग्लूकोज कोशिकाओं में प्रवेश नहीं कर पाता और खून में जमा होता रहता है, जिससे ब्लड शुगर बढ़ने लगता है।

डायबिटीज ही नहीं, और भी बीमारियों का खतरा

इंसुलिन रेजिस्टेंस को अगर समय रहते कंट्रोल न किया जाए, तो ये टाइप-2 डायबिटीज के साथ-साथ कई अन्य बीमारियों की जड़ बन सकता है। इससे मोटापा, दिल की बीमारियां, फैटी लिवर, मेटाबॉलिक गड़बड़ियां और महिलाओं में पीसीओएस जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।

मेटाबॉलिज्म पर पड़ता है सीधा असर

इस स्थिति के कारण मेटाबॉलिक सिंड्रोम होने की संभावना बढ़ जाती है। इससे शरीर में अतिरिक्त चर्बी जमा होती है, खासकर पेट के आसपास। साथ ही, ये हृदय रोग और स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ा सकता है।

कैसे करें नियंत्रण?

इंसुलिन रेजिस्टेंस को पूरी तरह से ठीक तो नहीं किया जा सकता, लेकिन कुछ आदतों में बदलाव कर इसे कंट्रोल में रखा जा सकता है:

रोजाना कम से कम 45 मिनट व्यायाम करें।

पर्याप्त नींद लें और तनाव से दूर रहें।

वजन नियंत्रित रखें और हेल्दी डाइट लें।

यदि इन उपायों के बाद भी ब्लड शुगर कंट्रोल में नहीं आता, तो डॉक्टर की सलाह लें। जरूरी हो तो दवाइयों या इंसुलिन इंजेक्शन की मदद भी ली जा सकती है।

Cold water side effects: ठंडा पानी पीने से हो सकती है गंभीर स्वास्थ्य समस्या, जानें क्या है सही तापमान

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।