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Rabies Infection: किन जानवरों के काटने से हो सकता है रेबीज? जानिए लक्षण और बचाव

Rabies Infection: रेबीज एक खतरनाक इंफेक्शन है। यह संक्रमित जानवर के काटने पर होता है। सही इलाज ना मिलने पर यह मरीज की जान भी ले सकता है। इसलिए इन जानवरों से बिल्कुल दूर रहें। वहीं कुछ ऐसे जानवर भी हैं, जिनके सिर्फ खरोंच से रेबीज हो सकता है। रेबीज ऐसी बीमारी है। जिसके फैलने से पहले इलाज न हो तो जान बचाना मुश्किल हो सकता है

MoneyControl Newsअपडेटेड Mar 26, 2025 पर 3:38 PM
Rabies Infection: किन जानवरों के काटने से हो सकता है रेबीज? जानिए लक्षण और बचाव
Rabies Infection: कुत्ते के काटने पर सबसे पहले उस जगह को धोना चाहिए।

कुत्ते का काटना काफी खतरनाक होता है। गली-मुहल्ले और सड़क पर घूमते कुत्ते अक्सर आते-जाते लोगों को काट लेते हैं। पैर या शरीर के किसी भी अंग में काट सकते हैं। ऐसे में अगर कुत्तों में जहर खत्म करने का टीका न लगा हो तो वह ज्यादा खतरनाक हो सकता है। इससे असहनीय दर्द तो होता ही है। इसके साथ ही ढेर सारे इंजेक्शन भी लगवाना पड़ता है। अगर सही समय पर इंजेक्शन (Dog Bite Injection) न लगवाया जाए तो रैबीज की बीमारी की चपेट में आ सकते हैं। इसके अलावा बंदर, घोड़ा, लोमड़ी जैसे कुछ जानवर ऐसे भी होते हैं। जिनके सिर्फ खरोंच से रेबीज हो सकता है।

कुत्ता काटने पर सबसे पहले उस जगह को धोना चाहिए। डिटर्जेंट साबुन जैसे कि रिन या सर्फ एक्सेल साबुन से इसे धोना चाहिए। अगर जख्म काफी गहरा है तो उस जगह साबुन से धोकर बिटाडिन मलहम लगाएं। इससे रेबीज वायरस का असर थोड़ा कम करने में मदद मिलती है। इसके साथ ही कुत्ते काटने के बाद टिटनस का इंजेक्शन भी सबसे पहले लगवाना चाहिए। टिटनेस का इंजेक्शन घाव ठीक करने के लिए नहीं बल्कि वैक्सीन की तरह काम करता है।

जानिए क्या है रेबीज

रेबीज एक ऐसी बीमारी है जो रेबीज नाम की विषाणु से फैलते हैं। खासकर यह जानवरों की बीमारी है। अगर किसी जानवर को यह बीमारी है। उसने किसी इंसान को काट लिया है तो यह बीमारी उसमें भी फैल जाएगी। यह विषाणु इंफेक्टेड जानवरों के लार में होता है। जब कोई इस बीमारी से इंफेक्टेड जानवर इंसान को काट लेता है तो यह विषाणु लार के जरिए इंसान के ब्लड में चला जाता है। रेबीज से संक्रमित जानवर के काटने से रेबीज का संक्रमण फैलता है। ज्यादातर मामलों में मनुष्यों में यह बीमारी कुत्ते के काटने या खरोंचने से भी होती है। इस बीमारी के लक्षण इंसान में कई महीनों से लेकर कई वर्षों तक में दिखाई देते हैं। हालांकि, आमतौर पर ये लक्षण 1 से 3 महीनों में दिखाई देते हैं।

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