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Ayurveda's Garbhadana Samskara: क्या है आयुर्वेद का गर्भाधान संस्कार जो दे रहा इनफर्टिलिटी को मात?

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और बदलती लाइफस्टाइल के बीच स्वस्थ प्रेग्नेंसी एक बड़ी चिंता बनती जा रही है। ऐसे में विशेषज्ञ गर्भधारण से पहले की तैयारी को जरूरी मान रहे हैं। आयुर्वेद का सदियों पुराना 'गर्भाधान संस्कार' भी इसी सोच को बढ़ावा देता है और इन दिनों फिर चर्चा में है

Edited By: Anchal Jhaअपडेटेड Jul 11, 2026 पर 1:13 PM
Ayurveda's Garbhadana Samskara: क्या है आयुर्वेद का गर्भाधान संस्कार जो दे रहा इनफर्टिलिटी को मात?
आज की जीवनशैली में तनाव, खराब खानपान और कई स्वास्थ्य समस्याएं प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर रही हैं।

आज के दौर में इनफर्टिलिटी, हार्मोनल असंतुलन और प्रेग्नेंसी से जुड़ी परेशानियां तेजी से सामने आ रही हैं। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि माता-पिता बनने की तैयारी सिर्फ गर्भधारण के बाद नहीं, बल्कि उससे पहले भी शुरू होनी चाहिए। इसी सोच को प्री-कन्सेप्शन केयर कहा जाता है, जिसमें गर्भधारण से पहले महिला और पुरुष दोनों के स्वास्थ्य, खानपान और मानसिक स्थिति पर ध्यान दिया जाता है।

दिलचस्प बात यह है कि आधुनिक चिकित्सा में जिस सोच पर अब जोर दिया जा रहा है, आयुर्वेद में इसकी चर्चा सदियों पहले ‘गर्भाधान संस्कार’ के रूप में की गई थी। इसमें स्वस्थ संतान के लिए माता-पिता को शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से तैयार करने की बात कही गई है।

सिर्फ बच्चा पैदा करना नहीं, स्वस्थ शुरुआत पर जोर

कर्नाटक के उडुपी स्थित SDM College of Ayurveda and Hospital में कई वर्षों से गर्भाधान संस्कार को आयुर्वेदिक प्री-कन्सेप्शन केयर के तौर पर अपनाया जा रहा है। यहां कई दंपती गर्भधारण से पहले सलाह लेने पहुंचते हैं। संस्थान की प्रिंसिपल और वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. ममता केवी के मुताबिक, इस प्रक्रिया का उद्देश्य केवल गर्भधारण में मदद करना नहीं, बल्कि भावी माता-पिता के स्वास्थ्य को बेहतर बनाना है। इसमें खानपान में सुधार, जीवनशैली में बदलाव, व्यक्तिगत आयुर्वेदिक उपचार और मानसिक परामर्श जैसी चीजों पर ध्यान दिया जाता है।

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