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Diabetes: बारिश में डायबिटीज मरीज ऐसे रखें पैरों का ख्याल, छोटी लापरवाही पड़ सकती है भारी

Diabetes: मानसून राहत के साथ संक्रमण का खतरा भी बढ़ा देता है। बारिश के पानी में मौजूद बैक्टीरिया और गंदगी डायबिटीज मरीजों के लिए परेशानी बढ़ा सकती है। डायबिटीज में छोटे घाव जल्दी ठीक नहीं होते, इसलिए पैरों की देखभाल बेहद जरूरी हो जाती है। बरसात में थोड़ी-सी सावधानी गंभीर संक्रमण से बचा सकती है

Edited By: Anchal Jhaअपडेटेड Jul 07, 2026 पर 8:45 AM
Diabetes: बारिश में डायबिटीज मरीज ऐसे रखें पैरों का ख्याल, छोटी लापरवाही पड़ सकती है भारी
Diabetes: बरसात में हमेशा बंद (Closed) और आरामदायक जूते पहनें।

मानसून का मौसम गर्मी से राहत, हरियाली और ठंडी फुहारों का एहसास लेकर आता है, लेकिन ये अपने साथ कई स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां भी लेकर आता है। बारिश के दौरान सड़कों पर जमा पानी अक्सर साफ दिखाई देता है, जबकि उसमें बैक्टीरिया, वायरस, फंगस, सीवर का पानी और अन्य हानिकारक सूक्ष्मजीव मौजूद हो सकते हैं। ऐसे पानी के संपर्क में आने से त्वचा संबंधी संक्रमण और पैरों की समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। ये जोखिम सामान्य लोगों की तुलना में डायबिटीज के मरीजों में कहीं अधिक होता है। डायबिटीज के कारण शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित हो सकती है और कई मरीजों में पैरों की नसों की संवेदनशीलता भी कम हो जाती है।

ऐसे में छोटी-सी खरोंच, छाला या कट का समय पर पता नहीं चल पाता, जबकि घाव भरने की प्रक्रिया भी धीमी हो जाती है। यदि इन घावों में संक्रमण हो जाए तो स्थिति गंभीर रूप ले सकती है। इसलिए बरसात के मौसम में डायबिटीज मरीजों के लिए पैरों की नियमित सफाई, सही फुटवियर पहनना और किसी भी छोटे बदलाव पर तुरंत ध्यान देना बेहद जरूरी माना जाता है।

बारिश का पानी क्यों बन सकता है खतरा?

बारिश के दौरान सड़कों पर जमा पानी साफ दिखाई दे सकता है, लेकिन उसमें कई तरह के बैक्टीरिया और गंदगी छिपी होती है। यदि डायबिटीज मरीज ऐसे पानी में चलते हैं, तो पैरों में छोटे-छोटे कट या खरोंच के जरिए संक्रमण आसानी से शरीर में प्रवेश कर सकता है।

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