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कैंसर की चपेट में देश की युवा पीढ़ी, 15 लाख हो गए शिकार, यह खाने से बढ़े मरीज

World Cancer Day: युवाओं में भी तेजी से कैंसर के मामले सामने आने लगे हैं। एक रिसर्च के मुताबिक 15 से 39 साल की उम्र के बीच वाले युवाओं में तेजी से कैंसर फैल रहा है। ICMR की नेशनल कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्राम के आंकड़ों में ही कैंसर रोगियों की संख्या 15 लाख तक पहुंच गई है। हर साल केस बढ़ रहे हैं

MoneyControl Newsअपडेटेड Feb 04, 2025 पर 11:03 AM
कैंसर की चपेट में देश की युवा पीढ़ी, 15 लाख हो गए शिकार, यह खाने से बढ़े मरीज
World Cancer Day: साल 2023 में कैंसर मरीजों की संख्या 15 लाख पार कर गई थी। तंबाकू खाने से सबसे ज्यादा कैंसर फैलता है।

भारत में कैंसर के मामले चीते की रफ्तार से बढ़ रहे हैं। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) की नेशनल कैंसर रजिस्ट्री के आंकड़ों को मुताबिक, देश में साल 2023 में कैंसर के 15 लाख मामले पहुंच गए हैं। इसके अलावा ऐसे हजारों केस भी होंगे, जिनका आंकड़ा नहीं मिल पाता होगा। कैंसर रोग का इलाज करने वाले डॉक्टरों का भी मानना है कि यह खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। सबसे ज्यादा युवा कैंसर की चपेट में आ रहे हैं। कैंसर से निपटने के लिए पूरी दुनिया में 4 फरवरी को कैंसर दिवस मनाया जाता है। इसके जरिए लोगों को जागरूक किया जाता है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में 15 से 39 साल की उम्र के बीच युवाओं में कैंसर 84100 मामले सामने आए हैं। यह सभी तरह के कुल कैंसर का 4.3 फीसदी है जो कि बेहद चिंता की बात है। भारत में पुरुषों में फेफड़े और महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के मामले तेजी से बढ़े हैं। 14 साल तक की उम्र में लिम्फोइड ल्यूकेमिया का खतरा बढ़ा है।

साल 2025 तक 10% बढ़ सकते हैं कैंसर के मरीज

ICMR के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2021 में कैंसर के 1426447 मामले सामने आएष साल 2022 में यह संख्या बढ़कर 1461427 हो गई। साल साल 2023 में 1496972 केस सामने आए। हर 9 में से से एक व्यक्ति को अपने जीवनकाल में कैंसर होने की संभावना है। जानकारों ने साल 2025 में कैंसर के मरीजों में 10 फीसदी बढ़ने की आशंका जताई है। आईसीएमआर का कहना है कि कैंसर का पता लगाने के लिए अब बेहतर डायग्नोस्टिक तकनीक है, इन तकनीकों की आम लोगों तक पहुंच और उपलब्धता है, जिसके चलते कैंसर का जल्दी भी पता लग जाता है। एडवांस स्टेज में जाने से पहले स्क्रीनिंग के जरिए कैंसर का पता लगने से इलाज होना संभव हो जाता है। ऐसे में स्क्रीनिंग पर ध्यान देने की जरूरत है और लक्षणों के बारे में जानकारी होना बेहद जरूरी है।

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