150 पुलिस वालों ने सद्गुरु के ईशा फाउंडेशन पर मारा छापा, एक पिता ने लगाया बेटियों को जबरन आश्रम में रखने का आरोप

मद्रास हाई कोर्ट ने सवाल किया कि वासुदेव, जिन्होंने अपनी बेटी की शादी कर उसे पारंपरिक जीवन में बसाने की व्यवस्था की थी, वह कथित तौर पर युवा महिलाओं को सांसारिक जीवन को त्यागने, अपना सिर मुंडवाने और अपने योग केंद्रों में साधु बन कर रहने के लिए क्यों प्रोत्साहित कर रहे थे

अपडेटेड Oct 01, 2024 पर 7:36 PM
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150 पुलिस वालों ने सद्गुरु के ईशा फाउंडेशन पर मारा छापा

मद्रास हाई कोर्ट के निर्देश के बाद मंगलवार, 1 अक्टूबर को कोयंबटूर के थोंडामुथुर में सद्गुरु के ईशा फाउंडेशन के आश्रम में 150 पुलिस अधिकारियों की एक टीम तलाशी लेने पहुंचे। अदालत ने फाउंडेशन के खिलाफ दर्ज सभी आपराधिक मामलों पर रिपोर्ट मांगी गई थी। एक असिस्टेंट डिप्टी SP के नेतृत्व में और तीन DSP को शामिल करते हुए पुलिस ने फाउंडेशन में तलाशी ली। ये पूरा मामला एक शख्स की उस याचिका के बाद उठा, जिसमें उसने आरोप लगाया कि उनकी बेटियों को फाउंडेशन ने जबरन रखा हुआ है।

दरअसल एक रिटायर प्रोफेसर डॉ. एस. कामराज ने एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की, जिन्होंने आरोप लगाया था कि उनकी दो बेटियों, 42 साल की गीता कामराज और 39 साल की लता कामराज को उनकी इच्छा के खिलाफ फाउंडेशन में रखा जा रहा था।

बेटियों का ब्रेनवॉश करने का आरोप


कामराज ने दावा किया कि संगठन ने उनकी बेटियों का ब्रेनवॉश किया, उन्हें मठवासी जीवन जीने के लिए मजबूर किया और उनके परिवार से संपर्क तोड़ दिया।

अदालत ने कोयंबटूर ग्रामीण पुलिस को जांच करने और रिपोर्ट करने का आदेश दिया। साथ ही ईशा फाउंडेशन के खिलाफ दर्ज किसी भी आपराधिक मामले की डिटेल भी मांगी।

सुनवाई के दौरान जस्टिस एसएम सुब्रमण्यम और वी. शिवगणनम ने सद्गुरु जग्गी वासुदेव के व्यक्तिगत जीवन और दूसरों के लिए उनकी वकालत की जीवनशैली के बीच स्पष्ट विरोधाभासों पर चिंता जताई।

अपनी बेटी की शादी कर के, सद्गुरु...

अदालत ने सवाल किया कि वासुदेव, जिन्होंने अपनी बेटी की शादी कर उसे पारंपरिक जीवन में बसाने की व्यवस्था की थी, वह कथित तौर पर युवा महिलाओं को सांसारिक जीवन को त्यागने, अपना सिर मुंडवाने और अपने योग केंद्रों में साधु बन कर रहने के लिए क्यों प्रोत्साहित कर रहे थे?

कामराज की याचिका में कहा गया कि फाउंडेशन में शामिल होने से पहले उनकी बेटियों की प्रोफेशनल उपलब्धियों के बारे में जाना गया था।

तलाक के बाद फाउंडेशन से जुड़ी बड़ी बेटी

उनकी बड़ी बेटी, गीता, यूके की एक प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी से मेक्ट्रोनिक्स में पोस्ट ग्रेजुएट थी। 2008 में उसका तलाक हुआ था, उससे पहले वह अच्छी खासी सैलरी पर जॉब करती थी।

तलाक के बाद, उसने ईशा फाउंडेशन में योग क्लास में शामिल होना शुरू किया। उसकी छोटी बहन, लता, जो एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर थी, जल्द ही उसके पीछे चली गई और आखिरकार उन्होंने हमेशा ही केंद्र में रहने का फैसला किया।

याचिका के अनुसार, फाउंडेशन ने बहनों को कथित तौर पर खाना और दवाइयां दीं, जिससे उनकी सोचने समझने की ताकत कमजोर हो गईं, जिससे उन्हें अपने परिवार के साथ संबंध तोड़ने पड़े।

कामराज ने यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (POCSO) अधिनियम के तहत एक आपराधिक मामले का भी हवाला दिया, जिसमें फाउंडेशन के एक डॉक्टर शामिल थे, जिस पर एक सरकारी स्कूल में 12 लड़कियों से छेड़छाड़ का आरोप था।

अदालत में मुकर गईं दोनों बेटियां

अदालत में, दोनों बेटियों ने अपने पिता के दावों का खंडन किया और कहा कि वे अपनी मर्जी से फाउंडेशन में रह रही हैं और उन्हें उनकी इच्छा के विरुद्ध नहीं रखा जा रहा है।

हालांकि, जस्टिस संशय में रहे। जस्टिस शिवगननम ने कहा, "हम जानना चाहते हैं कि जिस व्यक्ति ने अपनी बेटी की शादी कर दी और उसका घर-बार अच्छी तरह से बसाया, वह दूसरों को संन्यासी बनने के लिए क्यों प्रोत्साहित कर रहा है।"

ईशा फाउंडेशन ने रखा अपना पक्ष

ईशा फाउंडेशन के वकील के. राजेंद्र कुमार ने फाउंडेशन का बचाव करते हुए कहा कि वयस्कों को अपने जीवन के बारे में अपनी पसंद चुनने का अधिकार है, जिसमें आध्यात्मिक मार्ग अपनाना भी शामिल है।

उन्होंने तर्क दिया कि अदालत के पास बहनों की ओर से लिए गए व्यक्तिगत निर्णयों में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं था।

इसके बावजूद, जजों ने दोनों बहनों और उनके माता-पिता के बीच तनावपूर्ण संबंधों पर चिंता जताई। जस्टिस सुब्रमण्यम ने कहा, “आप आध्यात्मिकता के रास्ते पर होने का दावा करते हैं। क्या आपको नहीं लगता कि अपने माता-पिता की उपेक्षा करना पाप है? 'सबसे प्यार करो और किसी से नफरत मत करो' भक्ति का सिद्धांत है, लेकिन हम आपके अंदर अपने माता-पिता के लिए बहुत नफरत देख रहे हैं।

याचिकाकर्ता के वकील एम. पुरूषोत्तमन ने ईशा फाउंडेशन से जुड़े पिछले आपराधिक मामलों की ओर इशारा करते हुए कदाचार के व्यापक पैटर्न पर भी रोशनी डाली।

अदालत ने अब अतिरिक्त लोक अभियोजक, ई. राज तिलक को 4 अक्टूबर तक एक स्टेटस रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है, जिसमें फाउंडेशन के खिलाफ लंबित सभी आपराधिक मामलों की डिटेल हो।

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