Covid-19 Vaccination: क्या कोरोना वैक्सीनेशन के लिए Aadhaar कार्ड अनिवार्य है? केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में दिया ये जवाब

सुप्रीम कोर्ट की पीठ को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने सोमवार को बताया कि वैक्सीनेशन के लिए पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड, मतदान कार्ड, राशन कार्ड सहित नौ पहचान दस्तावेजों में से एक का ही होना अनिवार्य है

अपडेटेड Feb 07, 2022 पर 5:16 PM
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केंद्र सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि कोरोना वैक्सीनेशन के लिए कोविन पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करने के लिए आधार कार्ड अनिवार्य नहीं है

भारत को कोरोना महामारी के खिलाफ अपना सबसे बड़ा वैक्सीनेशन अभियान (Covid-19 Vaccination) शुरू किए एक साल से अधिक समय हो गया है। अब तक 169.63 करोड़ से अधिक लोगों को वैक्सीन लगाया जा चुका है, जिनमें से कल 14.70 लाख से अधिक लोगों को कोविड शॉट दिया गया। इस बीच, केंद्र सरकार ने देश की शीर्ष अदालत सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में स्पष्ट किया है कि कोविड-19 वैक्सीनेशन के वास्ते CoWIN प्लेटफॉर्म पर रजिस्ट्रेशन करने के लिए आधार कार्ड अनिवार्य नहीं है।

जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड़ और जस्टिस सूर्यकांत की एक पीठ को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) ने बताया कि वैक्सीनेशन के लिए पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड, मतदान कार्ड, राशन कार्ड सहित नौ पहचान दस्तावेजों में से एक का ही होना अनिवार्य है।

शीर्ष अदालत ने इस कथन पर गौर किया और सिद्धार्थशंकर शर्मा की याचिका का निपटारा किया। याचिका में दावा किया गया था कि कोविन प्लेटफॉर्म पर कोविड-19 वैक्सीनेशन के लिए रजिस्ट्रेशन कराने के लिए आधार कार्ड पर अनिवार्य रूप से जोर दिया जा रहा है। शीर्ष अदालत ने इस याचिका के संबंध में एक अक्टूबर 2021 को केंद्र को नोटिस जारी किया था।


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पीठ ने कहा कि एक अक्टूबर, 2021 के इस अदालत के आदेश के अनुसार, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने एक हलफनामा दाखिल किया है, जिसमें कहा गया है कि कोविन प्लेटफॉर्म पर रजिस्ट्रेशन के लिए आधार कार्ड अनिवार्य नहीं है और नौ पहचान दस्तावेजों में से किसी एक को भी इसके लिए इस्तेमाल किया जा सकता है....हलफनामे में यह भी कहा गया कि अन्य श्रेणी के लोगों के लिए प्रावधान किया गया है, जिनके पास पहचान पत्र नहीं हो सकते हैं जैसे जेल के कैदी, मानसिक हेल्थ सेंटरों के लोग आदि।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार के वकील ने बताया है कि बिना पहचान पत्र वाले लगभग 87 लाख लोगों को वैक्सीन लगाए गए हैं। याचिकाकर्ता की शिकायत है कि उसे आधार कार्ड नहीं होने के कारण वैक्सीनेशन से वंचित कर दिया गया था, इस समस्या का भी हलफनामे में निपटारा किया गया है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने महाराष्ट्र के प्रमुख सचिव (स्वास्थ्य) को संबंधित निजी वैक्सीनेशन सेंटर के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए एक पत्र भेजा गया है, जिसने वैध पासपोर्ट आईडी होने के बावजूद याचिकाकर्ता को वैक्सीन लगाने से इनकार कर दिया था।

शीर्ष अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता की शिकायत का विधिवत निपटारा किया जाता है। सभी संबंधित अधिकारी सरकार की नीति के अनुसार कार्य करें। याचिका में भारत के नागरिक को दिए गए वैक्सीनेशन के अधिकार की सुरक्षा के लिए पूरे देश में पहले से ही अधिसूचित नियमों/नीतियों को प्रभावी और गैर-भेदभावपूर्ण तरीके से लागू करने का अनुरोध किया गया था।

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