Agneepath: कितने साल की होगी सैनिक की नौकरी, कितनी मिलेगी सैलरी, इन 10 पॉइंट्स में समझें पूरी टूर ऑफ ड्यूटी स्कीम

Agneepath: इस हफ्ते केंद्रीय मंत्रिमंडल से ToD के प्रस्ताव को मंजूरी देने के साथ शुरू किया जा सकता है। इस स्कीम के तहत सैनिकों को शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म के लिए भर्ती किया जाना है

अपडेटेड Jun 14, 2022 पर 1:12 PM
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ToD के तहत सैनिकों को शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म के लिए भर्ती किया जाना है (FILE PIC)

टूर ऑफ ड्यूटी (ToD) स्कीम, जिसे अग्निपथ (Agneepath) नाम भी दिया गया है। इस हफ्ते केंद्रीय मंत्रिमंडल की तरफ से ToD के प्रस्ताव को मंजूरी देने के साथ शुरू किया जा सकता है। इस स्कीम के तहत सैनिकों को शॉर्ट टर्म यानी कम समय और लॉन्ग टर्म यानी लंबे समय के लिए भर्ती किया जाना है।

ड्यूटी के शुरुआती प्रस्ताव के अनुसार, सेना में सैनिकों की भर्ती तत्काल भविष्य में नई योजना के तहत की जानी है। 50% नए रंगरूटों के लिए सेवा का कार्यकाल तीन से पांच साल के बीच हो सकती है, जबकि बाकी का कार्यकाल बहुत लंबा हो सकता है।

क्या है टूर ऑफ ड्यूटी?


- वर्तमान में, सेना शॉर्ट सर्विस कमीशन के तहत युवाओं को 10 साल के शुरुआती कार्यकाल के लिए भर्ती करती है, जिसे 14 साल तक बढ़ाया जा सकता है। रिपोर्टों में कहा गया है कि नई योजना के तहत, तीन साल और उससे ज्यादा के लिए भर्ती किए जाने वाले लोग प्रमुख फारवर्ड मोर्चे पर लड़ाकू के रूप में तैनात होने के लायक होंगे। उनकी भूमिकाओं में कोई प्रतिबंध नहीं होगा।

- News18 ने शीर्ष सूत्रों के हवाले से बताया कि पहली बार में तीनों सेवाओं में 45,000 से ज्यादा रंगरूटों को लिया जाएगा। योजना के तहत भर्ती किए गए सैनिकों को 30,000 रुपये से 40,000 रुपये के बीच मासिक वेतन मिलेगा। एक सूत्र ने कहा, "उन्हें नियमित सैनिकों की तरह रिस्क और हार्डशिप भत्ता अलग से दिया जाएगा, जहां वे तैनात होंगे।"

- इस योजना के तहत 17.5 साल से 21 साल की उम्र के सैनिकों की भर्ती की जाएगी। उन्हें चार साल की सेवा के बाद हटा दिया जाएगा। इन चार सालों में छह महीने का ट्रेनिंग भी शामिल होगी। रंगरूटों के रिहा होने पर उनके लिए डिप्लोमा और डिग्री की भी योजना बनाई जा रही है।

- स्कीम के नए मसौदे में कहा गया है कि भारतीय सेना में सभी सैनिकों को आखिरकार टूर ऑफ ड्यूटी मॉडल के तहत भर्ती किया जाएगा। इनमें से लगभग 25% तीन साल बाद और 25% पांच साल पूरे होने पर रिलीज कर दिए जाएंगे। बाकी 50% अपनी रिटायरमेंट की उम्र तक पूरे समय के लिए सेना में सेवा करना जारी रखेंगे।

- इसके अलावा दो और स्कीम पर भी विचार किया जा रहा था। इनमें से एक में भर्ती किए गए 33% सैनिकों को स्थायी रूप से बनाए रखना था, जबकि उनमें से 33% को तीन और पांच साल के बाद हटा देना।

- दूसरी स्कीम में भर्ती किए गए कुल सैनिकों में से 40% को बनाए रखना था, जबकि 60% को तीन से पांच साल के बीच एक ही बोर्ड में रिटायर करना था।

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- सूत्रों ने पिछले महीने News18 को बताया था कि सेना ज्याद से ज्यादा सैनिकों को बनाए रखने के पक्ष में है। इसे तत्काल कटौती के बजाय धीरे-धीरे कम किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या शॉर्ट टर्म कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने के बाद रिलीज किए सेना से रिलीज किए गए सैनिकों को अर्धसैनिक बलों में शामिल किया जा सकता है। ताकि बाद में उनके कर्मियों की ट्रेनिंग पर होने वाले खर्च को कम किया जा सके।

- स्कीम के मसौदे में हर एक सैनिक और सरकार की तरफ से हर महीने बराबर-बराबर एक तय रकम जामा करनी होगी। नौकरी पूरी होने के बाद ये पूरा पैसा सैनिक को दिया जाएगा। ये रकम 10 लाख रुपए तक होगी।

- 'सेवा निधि पैकेज' में यह शामिल है कि हर महीने, एक सैनिक अपने वेतन का 30% और सरकार भी अपनी तरफ से उतनी ही रकम इसमें मिलाएगी। चार साल बाद रिटायर होने पर सैनिकों को ब्याज के साथ करीब 10 लाख रुपये मिलेंगे। सेवा निधि पैकेज नेशनल पेंशन स्कीम की तरह ही है।

- इस महीने की शुरुआत में, सूत्रों ने News18 को बताया कि सेवा निधि पैकेज का दावा करने के लिए सैनिकों को दो ऑपशन दिए जाएंगे। एक ऑप्शन यह होगा कि चार साल बाद रिटायर होने पर सैनिक के अकाउंट में 1 लाख रुपये जमा करें और बाकी बचे पैसे को लोन जुटाने के लिए बैंक गारंटी में बदल दें। दूसरा विकल्प ये है कि एक बार में ही पूरी रकम सिपाही के खाते में जमा करा दी जाए।

- सैनिकों की रिहाई के बाद, उनमें से एक निश्चित प्रतिशत को कुछ निश्चित मापदंडों के आधार पर अगले 15 सालों के लिए सेना में पूरे कार्यकाल के लिए फिर से नियुक्त किया जाएगा, जो अभी तक तैयार नहीं किए गए हैं। सूत्रों ने कहा कि उनकी पिछले चार साल की सेवा को उनके रिटायरमेंट पर पेंशन की गणना में शामिल नहीं किया जाएगा।

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