Assam: इन दिनों दुनिया भर में जलवायु परिवर्तन का असर देखा जा रहा है। इससे कई इलाकों के पक्षी, जानवरों पर असर पड़ा है। कुछ जगह तो कई पक्षी विलुप्त होने के कगार पर पहुंच गए हैं। कहीं पर पक्षियों की खोज भी की जा रही है। इस बीच में असम में भी कुछ ऐसा ही हो रहा है। अरण्यक (Aaranyak) नाम की एक जैव विविधता के संरक्षण के लिए काम करने वाले एक रिसर्च संगठन ने असम राज्य के बोंगईगांव (Bongaigaon) जिले के डोलोनोबिल (Doloni beel) इलाके में पक्षियों पर एक सर्वे किया है।
यह सर्वे बॉटनी और जूलोजी डिपार्टमेंट (Botany & Zoology Departments) के अभयपुरी कॉलेज (Abhayapuri College) और ऐ वैली फॉरेस्ट डिवीजन (Aie Valley Forest Division) ने मिलकर साथ में किया है।
सर्वे में हुआ बड़ा खुलासा
इस सर्वे में 40 सदस्यों की एक टीम शामिल थी। जिसमें अरण्यक के सदस्यों के साथ ही अभयपुरी कॉलेज के छात्र और कुछ स्थानीय लोग शामिल थे। इस सर्वे में 47 प्रजातियों की वेटलैंड बर्ड्स (दलदली इलाके में पाई जाने वाली चिड़िया) की 1847 चिडियों के रिकॉर्ड दर्ज किए हैं। इन प्रजातियों में रेड क्रस्टेड पोचर्ड (Red-crested Pochard),फेरूजीनस पेचर्ड (Ferrugeneous Pochard), टफ्टेड डक (Tufted Duck), गडवाल (Gadwall), यूरेशियन वेगन (Eurasian Wigeon), फुलवस व्हिसलिंग टील (Fulvous Whistling Teal), लेसर एडजुटेंट स्टॉर्क (Lesser Adjutant Stork) जैसी पक्षियां पाई गईं। अरण्यक के एक सीनियर वैज्ञानिक और प्रोफेशनल वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर उदयन बोरठाकुर (Udayan Borthakur) ने इस सर्वे में हिस्सा लेने वाले सदस्यों को पक्षियों की गणना करने के तरीके की जानकारी दी।
यह सर्वे 21 फरवरी को डोलोनी बील और सके आसपास के इलाकों में किया गया था। सर्वे में शामिल सदस्यों को 8 समूहों ग्रुप में बांटा गया था। इन समूहों का नेतृत्व उदयन बोरठाकुर, प्रांजल कुमार दास, चिन्मय स्वर्गरी, अशोक कुमार दास, सुब्रत सरकार, मानबेंद्र रे चौधरी, प्रांतिक रंजन रॉय, अंकुर बर्मन, हरमोहन राभा, रत्ना प्रभाकर राभा, मधुरिका चौधरी और विशाखा ने किया। इस सर्वे में अभयपुरी कॉलेज के छात्र भी शामिल रहे। इसके साथ ही स्थानीय नागरिक चंडिका रामा, नीरू राभा जैसे अन्य लोग भी शामिल रहे।