Bahraich Bhediya Attack: भेड़िये इतने आदमखोर कैसे हो गए, बहराइच में क्यों फैला है इतना आतंक? समझें
Bahraich Bhediya Attack: एक स्थानीय किशोर कुमार ने बताया कि यह पहली बार है, जब गांव वाले इस तरह के हमले देख रहे हैं। इंटरनेशनल वुल्फ सेंटर (IWC) भी उनके बयान का समर्थन करता है। इसमें कहा गया है कि ज्यादातर मांसाहारी शिकारियों में से भेड़ियों के इंसानों पर हमला करने की संभावना काफी कम है
Bahraich Bhediya Attack: भड़िये इतने आदमखोर कैसे हो गए?
भेड़िये, जिन्हें अक्सर फिल्मों और टेलीविजन शो में अलौकिक घटनाओं से जोड़कर दिखाया जाता है, असल में खतरनाक शिकारी हैं। इसका अंदाजा आप उत्तर प्रदेश के बहराइच में मचे इनके आतंक से लगा सकते हैं, जहां आठ बच्चों और एक महिला की मौत हो गई। छह भेड़ियों का एक झुंड पिछले दो महीनों से बहराईच डिवीजन के गांवों में आतंक मचा रहा है। उन्होंने पिछले दो महीनों में नौ इंसानों का शिकार किया है। बाद में वन विभाग ने ऑपरेशन भेड़िया चलाया और चार भेड़ियों को पकड़ा। झुंड के बाकी दो सदस्यों की अब भी तलाश है।
News18 के मुताबिक, एक स्थानीय किशोर कुमार ने बताया कि यह पहली बार है, जब गांव वाले इस तरह के हमले देख रहे हैं। इंटरनेशनल वुल्फ सेंटर (IWC) भी उनके बयान का समर्थन करता है। इसमें कहा गया है कि ज्यादातर मांसाहारी शिकारियों में से भेड़ियों के इंसानों पर हमला करने की संभावना काफी कम है।
क्या भेड़िये आमतौर पर इंसानों पर हमला करते हैं?
आमतौर पर इसका जवाब है- नहीं। भेड़िये, हालांकि मांसाहारी होते हैं, अपने झुंड के साथ केवल चुनिंदा जगहों पर ही एक्टिव रहते हैं और अक्सर लंबे समय तक एक ही शिकार को खाते हैं।
IWC के अनुसार, वे लगातार 'दावत या अकाल' मोड में रहते हैं, जिसका मतलब है कि वे कुछ समय के लिए बड़ी मात्रा में खाते हैं और फिर लंबे समय तक शिकार नहीं करते हैं।
2002 से 2020 तक नॉर्वेजियन इंस्टीट्यूट फॉर नेचर रिसर्च की एक ग्लोबल स्टडी से पता चला है कि इन 18 सालों के दौरान दुनिया भर में मनुष्यों पर भेड़ियों के केवल 26 घातक हमले हुए थे।
इनमें से चार भारत में हुए और घातक थे, क्योंकि पीड़ितों को रेबीज हो गया था। असल में, स्टडी में ऐसा माना गया है कि भेड़ियों के हमलों के खतरे "न के बराबर, लेकिन गणना करने के लिए बहुत कम" हैं।
क्यों आदमखोर हो जाते हैं भेड़िये?
- आदतन आदमखोर: ये भेड़िये आदमखोर क्यों बने होंगे, इस पर एक थ्योरी ये भी है कि शायद ये आदतन आदमखोर हैं। भले ही भेड़िये शर्मीले प्राणी हैं, जो अपने इलाके से बाहर नहीं निकलते हैं, लेकिन मानव बस्तियों के करीब रहने से अक्सर उनकी हिचकिचाहट दूर हो जाती है और वे इंसानों की बस्तियों में शिकार करना शुरू कर देते हैं।
- भेड़ियों और कुत्तों की क्रॉस ब्रीडिंग: जीवविज्ञानी यादवेंद्रदेव झाला का कहना है कि इलाके में कुत्तों और भेड़ियों की क्रॉस ब्रीडिंग के कारण भेड़िये इंसानों की बस्तियों में ज्यादा आरामदायक हो गए हैं और शायद इसलिए ही इन गांवों में भी शिकार कर रहे हैं।
- शेल्टर या फूड सोर्स न होना: खाने की कमी भी ऐसे हमलों का कारण बन सकती है। अगर भेड़िये खतरा महसूस करते हैं या उनके पास पर्याप्त भोजन नहीं होता, तो वे हमला कर सकते हैं।
भेड़िये भी अक्सर छोटे शिकार को ही निशाना बनाते हैं - वे उन जानवरों को प्राथमिकता देते हैं जो कमज़ोर, ज्यादा संवेदनशील होते हैं। बहराइच में मारे गए बच्चों की ज्यादा संख्या इस बात की पुष्टि करती है। IWC के अनुसार, आदमखोर भेड़िये अक्सर बच्चों को अपना शिकार बनाते हैं, क्योंकि वे आसान शिकार होते हैं।
IWC के 2020 तक के डेटा से पता चलता है कि भारत में 4,400-7,100 भेड़िये थे। भारतीय भेड़िये को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I के तहत कानूनी रूप से संरक्षित किया गया है। मतलब उनका शिकार करना गैर-कानूनी है।
हालांकि, भेड़िए लंबे समय से जंगलों, खेतों और घाघरा नदी के बाढ़ के मैदानों में इंसानों के साथ रहते आए हैं, लेकिन बहराईच में हुए हमलों ने मानव-पशु संघर्ष की जड़ों और इसके गंभीर परिणामों की ज्यादा समझ की जरूरत पर रोशनी डाली है।