नेशनल हाइड्रोजन मिशन को कैबिनेट की मंजूरी, 50 लाख टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य- सूत्र

लक्ष्मण ने सूत्रों के हवाले से कहा कि सरकार का 50 लाख टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन करने का टारगेट है। 2030 तक सरकार 50 लाख टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन करने का इरादा रखती है। ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन होने पर ये पहले फर्टिलाइजर, स्टील जैसे सेक्टर को सप्लाई की जायेगी। सूत्रों के मुताबिक ग्रीन हाइड्रोजन पर 8 लाख करोड़ से अधिक निवेश किया जायेगा

अपडेटेड Jan 04, 2023 पर 1:39 PM
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लक्ष्मण रॉय ने कहा कि ग्रीन हाइड्रोजन से 1 लाख करोड़ रुपये का ऑयल इंपोर्ट घटेगा। इतना ही नहीं इस मिशन से 6 लाख से ज्यादा रोजगार पैदा होंगे

सरकार ने नेशनल हाइड्रोजन मिशन को मंजूरी दे दी है। आज कैबिनेट की बैठक हुई जिसमें नेशनल हाइड्रोजन मिशन को कैबिनेट की हरी झंडी मिल गई है। सूत्रों के मुताबिक कैबिनेट और CCEA की बैठक थोड़ी देर पहले खत्म हुई। इस बैठक में इसे मंजूरी दे दी है। हालांकि इसका औपचारिक ऐलान दोपहर 3 बजे होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस में किया जा सकता है। ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत सरकार का 50 लाख टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य है। इसके लिए प्लांट लगाने के लिए वित्तीय मदद भी मिल सकती है। 2030 तक 50 लाख टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन करने का लक्ष्य तय किया गया है। सूत्रों से मिली इस एक्सक्लूसिव खबर को सीएनबीसी-आवाज़ के लक्ष्मण रॉय ने ब्रेक की है।

लक्ष्मण रॉय ने कहा कि सूत्रों के हवाले से ये खबर मिली है कि कैबिनेट और CCEA की बैठक में नेशनल हाइड्रोजन मिशन को मंजूरी मिली है। कैबिनट की दोपहर 3 बजे कैबिनेट प्रेस कॉन्फ्रेंस है जिसमें इसका ऐलान किया जा सकता है। सूत्र बता रहे हैं कि ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट के लिए वित्तीय मदद भी दी जायेगी। इसमें प्लांट लगाने पर वित्तीय मदद का प्रस्ताव भी पेश किया गया था।

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लक्ष्मण ने कहा कि सरकार का 50 लाख टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन करने का लक्ष्य है। सरकार 2030 तक 50 लाख टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन करना चाहती है। इसका उत्पादन होने पर ये पहले फर्टिलाइजर, स्टील जैसे सेक्टर को सप्लाई की जायेगी। ग्रीन हाइड्रोजन पर 8 लाख करोड़ से अधिक निवेश किया जायेगा। जबकि SIGHT प्रोग्राम पर 17,490 करोड़ रुपये का निवेश होगा।

लक्ष्मण ने आगे कहा कि सूत्र बता रहे हैं कि इस मिशन कंपोनेंट पर 390 करोड़ रुपये खर्च होंगे। जबकि इसके R&D पर 400 करोड़ रुपये खर्च होंगे। वहीं हाइड्रोजन मिशन पर 19,750 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसके पायलट प्रोजेक्ट पर 1,470 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

लक्ष्मण ने कहा कि इसके अलावा इसका सबसे बड़ा फायदा ये होगा कि ग्रीन हाइड्रोजन से 1 लाख करोड़ रुपये का ऑयल इंपोर्ट घटेगा। इस मिशन से 6 लाख से ज्यादा नौकरियां पैदा होंगी।

 

 

 

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