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फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण के सामने ये हैं अहम चुनौतियां

निर्मला सीतारमण के सामने कई चुनौतियां हैं जिनसे निपटने के लिए उन्हें कई रिफॉर्म्स करने होंगे। क्या हैं चुनौतियां?

MoneyControl Newsअपडेटेड May 31, 2019 पर 2:59 PM
फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण के सामने ये हैं अहम चुनौतियां

नरेंद्र मोदी ने निर्मला सीतारमण को देश का नया फाइनेंस मिनिस्टर बनाया है। नरेंद्र मोदी के पहले कार्यकाल में डिफेंस मिनिस्ट्री की जिम्मेदारी संभालने वाली निर्मला सीतारमण को विरासत में सुस्त अर्थव्यवस्था मिली है।

JNU से पढ़ाई करने वाली 59 साल की निर्मला सीतारमण को नरेंद्र मोदी सरकार के पहले कार्यकाल के दौरान ही प्रमोट करके डिफेंस मिनिस्टर बनाया गया था। अब अरुण जेटली की खराब सेहत के बाद फाइनेंस मिनिस्ट्री की जिम्मेदारी दी गई है।

ऐसा है करियर?

इकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक, सीतारमण ने 2006 में बीजेपी ज्वाइन किया था। उस वक्त नितिन गडकरी पार्टी की चीफ थे। उन्हें तब पार्टी का नेशनल प्रवक्ता नियुक्त किया गया था। अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के दौरान 2003 में उन्हें नेशनल वुमेन फॉर कमिशन का सदस्य बनाया गया था। वह 2005 तक इस पद पर बनी रहीं। सीतारमण के करियर पर गौर किया जाए तो औपचारिक तौर पर पार्टी में शामिल होने के 11 साल के भीतर वह डिफेंस मिनिस्टर बनीं और 13 साल के भीतर उन्हें फाइनेंस मिनिस्टर की अहम जिम्मेदारी दे गई है।

निर्मला सीतारमण के सामने कई चुनौतियां हैं जिनसे निपटने के लिए उन्हें कई रिफॉर्म्स करने होंगे। क्या हैं चुनौतियां?

अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना

देश GDP की ग्रोथ को पटरी पर लाना सबसे बड़ी चुनौती है। फिस्कल ईयर 2018 की पहली तिमाही में GDP की ग्रोथ 6 फीसदी थी। फिस्कल ईयर 2019 की चौथी तिमाही में इसके 7 फीसदी रहने का अनुमान था लेकिन यह ग्रोथ सिर्फ 6.5 फीसदी है।

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