क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड इन दिनों चर्चा का केंद्र बना हुआ है। 35 लाख रुपये का केले का बिल और रोजाना का करीब 50 लाख रुपये खर्च एसोसिएशन की ऑडिट रिपोर्ट में आया है। इसके अलावा क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड नें कोविड के समय में 11 करोड़ रुपये खर्च किये हैं। यह आरोप क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड पर लग रहे हैं।
क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड पर लगे आरोप
ये मामला सुर्खियों में बना हुआ है। उत्तराखंड पुलिस ने एसोसिएशन के सचिव माहिम वर्मा, मुख्य कोच मनीष झा और प्रवक्ता संजय गुसाईं से पूछताछ शुरू कर दी गई है। इन सभी लोगों के नाम उस एफआईआर में हैं। इंडियन एक्सप्रेस को देहरादून के एसएसपी जन्मजेय खंडूरी ने बताया कि पिछले तीन दिन में हमने माहिम वर्मा, मनीष झा और संजय गुसाईं से बुलाकर पूछताछ की है। इनके बयान दर्ज किये गए हैं और इनसे दोबारा भी पूछताछ होगी।
बातचीत के दौरान खिलाड़ियों ने बताया कि उन्हें 100 रुपये DA दिया गया जबकि तय राशि 1500 रुपये है। इतना ही नहीं टूर्नामेंट और ट्रेनिंग कैंप के दौरान खाना तक नहीं दिया गया जबकि कोविड महामारी के दौरान लाखों के बिल दिखाए गए हैं।
कोरोना काल में खिलाड़ियों ने खाए 35 लाख के केले?
उत्तराखंड क्रिकेट एसोसिएशन की 31 मार्च 2020 की ऑडिट रिपोर्ट में बताया गया है कि खिलाड़ियों के खाने पर 1.74 करोड़ रुपये और दैनिक भत्ते पर 49 लाख रुपये खर्च किये गए हैं। केले के बिल पर ही 35 लाख रुपये खर्च हुए हैं और पानी की बोतल 22 लाख रुपये खर्च किये गए हैं।
शिकायतकर्ता वीरेंद्र सेठी पूर्व अंडर 19 खिलाड़ी आर्य सेठी के पिता ने आरोप लगाया कि उनके बेटे को पिछले साल विजय हजारे टूर्नामेंट के दौरान उत्तराखंड क्रिकेट टीम के कोच मनीष झा, टीम मैनेजर नवनीत मिश्रा और वीडियो एनालिस्ट पीयूष रघुवंशी ने जान से मारने की धमकी दी। साथ ही टीम में चुने जाने के लिए 10 लाख रुपये मांगने का भी आरोप लगाया है।