Manufacturing PMI : भारत की मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई 18 महीने के निचले स्तर पर, दिसंबर में छुआ 54.9 का स्तर

December Manufacturing PMI : 03 जनवरी को आए HSBC परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) इंडेक्स 54.9 के स्तर पर आ गया है। दिसंबर में भारत का पीएमआई 54.9 रहा है। हालांकि इस गिरावट के बावजूद भारत की मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की गतिविधियों में दिसंबर में भी विस्तार जारी रहा है। गौरतलब है कि नवंबर महीने में भारत का पीएमआई 56 पर था

अपडेटेड Jan 03, 2024 पर 1:13 PM
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PMI इंडेक्स का संकलन करने वाली एसएंडपी ग्लोबल का कहना है कि दिसंबर में कारोबारी सेक्टरों में अच्छी ग्रोथ देखने को मिली है।

December Manufacturing PMI : 03 जनवरी को आए HSBC परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) इंडेक्स 54.9 के स्तर पर आ गया है। दिसंबर में भारत का पीएमआई 54.9 रहा है। हालांकि इस गिरावट के बावजूद भारत की मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की गतिविधियों में दिसंबर में भी विस्तार जारी रहा है। गौरतलब है कि नवंबर महीने में भारत का पीएमआई 56 पर था। इस गिरावट के बावजूद दिसंबर में भारत की मैन्युफैक्चरिंग गतिविधि 50 के स्तर से ऊपर बनी हुई है। जिससे पता चलता है कि लगातार 30वें महीने भारत में उत्पादन गतिविधियों में विस्तार जारी रहा है।

बता दें कि PMI की 50 से ऊपर की रीडिंग मैन्युफैक्चरिंग गतिविधि में विस्तार का संकेत देती है। जबकि 50 से नीचे की रीडिंग मैन्युफैक्चरिंग गतिविधि में संकुचन का संकेत होती है।

PMI इंडेक्स का संकलन करने वाली एसएंडपी ग्लोबल का कहना है कि दिसंबर में कारोबारी सेक्टरों में अच्छी ग्रोथ देखने को मिली है। ताजे आंकड़ें लंबी अवधि के औसत से बेहतर है, लेकिन तिमाही औसत की तुलना मे कमजोर है।


आज आए आंकड़ों से पता चलता है कि कीमत के मोर्चे पर बड़ी राहत मिली है। दिसंबर महीने में उत्पादकों पर कच्चे माल की कीमतों में महंगाई का दबाव कम हुआ है। इस सर्वे के दौरान भारतीय उत्पादकों ने इस बात की उम्मीद जताई है कि अगली तिमाही में उत्पादन में बढ़ोतरी की उम्मीद है। उनका मानना है कि विज्ञापन के बढ़ते खर्च, बेहतर कस्टमर रिलेशन और नई पुछताछ (इनक्वायरी) के चलते दिसंबर में उत्पादकों के विश्वास को मजबूती मिली है।

इन आंकड़ों से पता चलता है कि दिसंबर महीने में नए आर्डरों की संख्या पिछले डेढ़ साल के सबसे निचले स्तर पर रही है। जिसके चलते मैन्युफैक्चरिंग आउटपुट अक्टूबर 2022 के बाद के निचले स्तर पर पहुंच गई है। इस गिरावट की मुख्य वजह कुछ प्रोडक्ट्स की मांग में कमजोरी रही है। हालांकि इसी अवधि में इंटरनेशनल आर्डर्स में लगातार 21वें महीने बढ़त देखने को मिली है।

इन आंकड़ों से पता चलता है कि दिसंबर महीने में नए आर्डरों की संख्या पिछले डेढ़ साल के सबसे निचले स्तर पर रही है। जिसके चलते मैन्युफैक्चरिंग आउटपुट अक्टूबर 2022 के बाद के निचले स्तर पर पहुंच गई है। इस गिरावट की मुख्य वजह कुछ प्रोडक्ट्स की मांग में कमजोरी रही है। हालांकि इसी अवधि में इंटरनेशनल आर्डर्स में लगातार 21वें महीने बढ़त देखने को मिली है। जबकि न्यू एक्सपोर्ट्स सेल्स के आंकड़े पिछले 8 महीने में सबसे धीमी दर से बढ़े हैं।

 

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