Delhi AQI: दिल्ली में वायु प्रदूषण का कहर! IGI एयरपोर्ट पर विजिबिलिटी 1,800 मीटर से भी कम, कई इलाकों में हालत 'गंभीर'

Delhi AQI Today: दिल्ली एयरपोर्ट पर 50 मीटर की विजिबिलिटी पर लैंडिंग की अनुमति है। जबकि 125 मीटर की विजिबिलिटी पर टेकऑफ की अनुमति है। राष्ट्रीय राजधानी में वायु प्रदूषण 4 नवंबर को "गंभीर" कैगेटरी में रहा, जिसमें AQI 381 पर पहुंच गया

अपडेटेड Nov 05, 2024 पर 10:34 AM
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Delhi AQI Today: राष्ट्रीय राजधानी में वायु प्रदूषण 4 नवंबर को "गंभीर" कैगेटरी में रहा

Delhi AQI Today: इंडियन मेट्रोलॉजिकल डिपार्टमेंट (IMD) ने बताया कि मंगलवार (5 अक्टूबर) को नई दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर विजिबिलिटी घटकर 1800 मीटर रह गई। जबकि सोमवार रात भर इस इलाके में विजिबिलिटी 2,100 मीटर रही। दिल्ली एयरपोर्ट पर 50 मीटर की विजिबिलिटी पर लैंडिंग की अनुमति है। जबकि 125 मीटर की विजिबिलिटी पर टेकऑफ की अनुमति है। राष्ट्रीय राजधानी में वायु प्रदूषण 4 नवंबर को "गंभीर" कैगेटरी में रहा, जिसमें AQI 381 पर पहुंच गया। यह देश में दर्ज किया गया दूसरा सबसे खराब कैटेगरी है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, 17 निगरानी स्टेशनों ने AQI को "गंभीर" कैटेगरी में दर्ज किया, जिसमें प्रदूषण का स्तर 400 से अधिक था। अमृतसर में श्री गुरु रामदास जी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर मंगलवार सुबह 5:30 बजे से 800 मीटर विजिबिलिटी दर्ज की गई।

उत्तर-पश्चिम भारत के अन्य एयरपोर्ट जैसे लखनऊ, गोरखपुर और जयपुर पर रात के दौरान विजिबिलिटी 1800 मीटर से अधिक दर्ज की गई। 4 नवंबर को दिल्ली में देश में दूसरा सबसे खराब AQI दर्ज किया गया। इसके बाद उत्तर प्रदेश के नोएडा, हरियाणा के मानेसर, कैथल और हिसार तथा बिहार के हाजीपुर का स्थान रहा, जहां एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) "बहुत खराब" कैटेगरी में दर्ज की गई। राजस्थान के श्रीगंगानगर में देश में सबसे खराब AQI दर्ज किया गया।


हवाओं से भी नहीं मिली राहत

हवाओं के कारण मिली अस्थायी राहत के बावजूद, दिवाली के बाद राष्ट्रीय राजधानी में प्रदूषण के स्तर में वृद्धि देखी गई है। शून्य से 50 के बीच AQI को 'अच्छा', 51 से 100 के बीच 'संतोषजनक', 101 से 200 के बीच 'मध्यम', 201 से 300 के बीच 'खराब', 301 से 400 के बीच 'बहुत खराब', 401 से 450 के बीच 'गंभीर' और 450 से ऊपर 'अत्यंत गंभीर' माना जाता है।

सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता

इस बीच, सुप्रीम कोर्ट ने दिवाली पर राष्ट्रीय राजधानी में प्रदूषण के स्तर में जबरदस्त वृद्धि पर सोमवार को गंभीर चिंता जताई। शीर्ष अदालत ने अदालती आदेशों के उल्लंघन का संज्ञान लेते हुए कहा कि पटाखों पर प्रतिबंध से जुड़े उसके निर्देशों पर शायद ही अमल हुआ। कोर्ट ने दिल्ली सरकार और पुलिस कमिश्नर से यह बताने को कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में पटाखों के निर्माण, ब्रिकी और उन्हें फोड़ने पर पूर्ण प्रतिबंध संबंधी आदेशों को लागू करने के लिए क्या कदम उठाए गए और उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई।

जस्टिस अभय एस. ओका और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने अखबारों में प्रकाशित उन खबरों का हवाला दिया, जिनमें पटाखों पर प्रतिबंध से जुड़े अदालती आदेशों के उल्लंघन का जिक्र किया गया है। पीठ ने कहा, "हम चाहते हैं कि दिल्ली सरकार तुरंत जवाब दे कि ऐसा क्यों हुआ। हम चाहते हैं कि दिल्ली में पटाखों की बिक्री, निर्माण और उन्हें फोड़ने पर प्रतिबंध लगाने से जुड़े सभी आदेश रिकॉर्ड पर रखे जाएं।"

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पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने सोमवार को कहा कि हवा की कम गति के कारण दिल्ली में वायु प्रदूषण बढ़ रहा है। राय ने कहा कि वह मंगलवार को शीतकालीन कार्य योजना के तहत विभिन्न विभागों और एजेंसियों द्वारा किए गए सभी मापों की समीक्षा करेंगे।

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