इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी मिनिस्ट्री (MeitY) ने 3 जनवरी को डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट का मसौदा (ड्राफ्ट) जारी कर दिया। इस कानून को संसद में अगस्त 2023 में जारी किया गया था। सरकार ने MyGov पोर्टल के जरिये इस मसौदे पर 18 फरवरी 2025 तक राय मांगी है। इन नियमों से इस कानून के विभिन्न प्रावधानों को लेकर स्पष्टता मिलने की उम्मीद है, मसलन कन्सेंट मैनेजर का रजिस्ट्रेशन और जिम्मेदारियां, बच्चों और अन्य लोगों के पर्सनल डेटा की प्रोसेसिंग आदि के बारे में चीजें साफ हो सकेंगी।
इन नियमों के जरिये डेटा प्रोटेक्शन बोर्ड की स्थापना, बोर्ड के चेयरपर्सन और अन्य सदस्यों की सेवा शर्तों को लेकर चीजें साफ होने की उम्मीद है। इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी मिनिस्ट्री का कहना है कि सलाह-मशवरे के दौरान दी गई राय का खुलासा नहीं किया जाएगा और नियमों को अंतिम रूप दिए जाने के बाद इस राय के सार को पब्लिश किया जाएगा।
क्या कहते हैं नियमः एक झलक
बच्चों के डेटा की प्रोसेसिंग: नियमों के मसौदे के मुताबिक, डेटा मैनेज करने वालों को बच्चों के डेटा की प्रोसेसिंग के लिए पहले माता-पिता की अनुमति लेने का सिस्टम बनाना चाहिए। यह डेटा प्रोसेसिंग सरकार द्वारा जारी आईडी या डिजिटल लॉकर्स द्वारा जारी किए गए डिजिटल टोकन के जरिये प्रोसेस किया जा सकता है। मसौदे के मुताबिक, शैक्षणिक संस्थाओं और बाल कल्याण संगठनों के लिए बच्चों के डेटा की प्रोसेसिंग के मामले में छूट का भी प्रावधान किया गया है।
कन्सेंट मैनेजर फ्रेमवर्क: नियमों के मसौदे के मुताबिक कन्सेंट मैनेजरों के लिए डेटा प्रोटेक्शन बोर्ड के साथ रजिस्ट्रेशन होगा और इसका नेटवर्थ कम से कम 12 करोड़ रुपये होना चाहिए।
डेटा प्रोटेक्शन बोर्ड की स्थापना: नियमों में रेगुलेटरी बॉडी के तौर पर डेटा प्रोटेक्शन बोर्ड की स्थापना का भी प्रस्ताव किया गया है। यह डिजिटल ऑफिस के तौर पर ऑपरेट करेगा, इसमें रिमोट सुनवाई होगी और इसमें उल्लंघन की जांच और जुर्माना लगाने का भी अधिकार होगा।