सितंबर में खत्म तिमाही (September Quarter) में फाइनेंशियल और बैंकिंग सेक्टर (Financial and Banking Sectors) की कंपनियां प्रॉफिट कमाने के मामले में सबसे आगे रहीं। दूसरे सेक्टर खासकर कंज्यूमर स्टेपल्स और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स कंपनियां अब भी कमजोर दिख रही हैं। इससे पता चलता है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था (Rural Economy) अब भी कोरोना की महामारी से पूरी तरह से नहीं उबर सकी है। कंज्यूमर से जुड़ी कंपनियां इकोनॉमी की सेहत (Condition of Economy) के बारे में बताती हैं।
कंजम्प्शन स्पेस की कंपनियों के अब तक आए नतीजों से पता चलता है कि इकोनॉमिक रिकवरी की रफ्तार अभी सुस्त है। कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज रिसर्च के एनालिस्ट्स ने कहा, "ऑटो और कंज्यूमर स्टेपल्स की वॉल्यूम की तीन साल की CAGR और कंज्यूमर ड्यूरबेल्स कंपनियों के रेवेन्यू को देखने से संकेत मिलता है कि डिमांड की स्थितियां अब भी परिवारों की इनकम और बैलेंसशीट्स पर कोरोना की महामारी की मार से पूरी तरह नहीं उबर सकी हैं।"
उनका कहना है कि जब तक ग्रोथ की रफ्तार नहीं बढ़ती है अर्निंग अपग्रेड की उम्मीद बहुत कम है। कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की रिपोर्ट के मुताबिक, इस वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में अब तक आए नतीजे निराशाजनक रहे हैं। निफ्टी 50 इंडेक्स की कंपनियों का कुल प्रॉफिट अनुमान के मुकाबले 4.6 फीसदी कम है। फाइनेंशियल कपनियों को हटा देने पर यह अनुमान के मुकाबले 7.7 फीसदी कम है।
कोटक की रिपोर्ट में कहा गया है, "हमें फाइनेंशियल्स को छोड़ कई सेक्टर में काफी कमजोरी दिखती है। इससे अर्निंग अपग्रेड की उम्मीद घट जाती है। हिस्टोरिकल बेसिस और बॉन्ड यील्ड के आधार पर मार्केट मल्टीपल ज्यादा हैं।" ग्रोथ स्टॉक्स में भी यह चीज दिखती है, जिनकी मार्च 2019 के बाद से रिरेटिंग हो चुकी है।
कोटक के एनालिस्ट्स का कहना है कि कंज्यूमर स्टेपल्स स्टॉक्स की वॉल्यूम तीन साल में औसतम माइनस 1.6 से 15 फीसदी है, जबकि कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी कंपनियों की वॉल्यूम ग्रोथ इस वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में सालाना 5 से 18 फीसदी रही है। इस दौरान कंज्यूमर ड्यूरेबल्स कंपनियों के रेवेन्यू की सीएजीआर तीन साल में 3 से 17 फीसदी रही है।
स्टेप्लस में कमजोरी की वजह कम आय वर्ग के परिवारों पर कोरोना की महामारी का ज्यादा असर हो सकती है। ऐसा लगता है कि उन्होंने कंजम्प्शन घटाया है। वे सस्ते प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। यह भी हो सकता है कि उन्होंने अनऑर्गेनाइज्ड सेक्टर के अनब्रांडेड प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल शुरू कर दिया हो।