क्रूड ऑयल इंपोर्ट के सिर्फ 25% खर्चे पर भारत खुद ऑयल प्रोडक्शन कर सकता है, Vedanta के अनिल अग्रवाल ने बताया फॉर्मूला

Anil Agarwal का मानना है कि देश के प्राकृतिक संसाधनों का पूरा इस्तेमाल तभी होगा, जब सरकार इस सेक्टर में प्राइवेट कंपनियों को इजाजत देगी। इंडिया अपनी जरूरत के 85 ऑयल का आयात करता है। इस पर काफी विदेशी मुद्रा खर्च होती है

अपडेटेड Jul 19, 2022 पर 10:14 AM
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Vedanta के चेयरमैन ने कहा कि इंडिया के लिए मेटल्स, रेयर मेटल्स, मिनरल्स और हाइड्रोकार्बंस की अपनी एक्सप्लोरेशन और प्रोडक्शन पॉलिसी में बदलाव करना बहुत जरूरी हो गया है।

इंडिया क्रूड ऑयल (Crude Oil) के इंपोर्ट प्राइस के एक चौथाई पर क्रूड ऑयल का उत्पादन कर सकता है। Vedanta Ltd के चेयरमैन अनिल अग्रवाल (Anil Agarwal) ने यह बात कही है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ज्यादा प्राइवेट कंपनियों को ऑयल के एक्सप्लोरेशन और प्रोडक्शन (Exploration and Production) की इजाजत दे तो यह मुमकिन है।

अग्रवाल का मानना है कि देश के प्राकृतिक संसाधनों का पूरा इस्तेमाल तभी होगा, जब सरकार इस सेक्टर में प्राइवेट कंपनियों को इजाजत देगी। इंडिया अपनी जरूरत के 85 ऑयल का आयात करता है। इस पर काफी विदेशी मुद्रा खर्च होती है। हाल में क्रूड ऑयल और कोयले का आयात बढ़ने से इंडिया का व्यापार घाटा अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। इसका असर रुपया पर पड़ रहा है। सोमवार (18 जुलाई) को डॉलर के मुकाबले रुपया 79.98 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया।

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वेदांता के चेयरमैन ने कहा, "इंडिया इंपोर्ट प्राइस के एक-चौथाई प्राइस पर ऑयल का उत्पादन कर सकता है। केयर्न इसी भाव यानी 26 डॉलर पर ऑयल दे रही है। हमारी इकोनॉमिक ग्रोथ में ट्रेडिशनल इंडस्ट्रीज (Legacy Industries) और स्टार्टअप्स का बड़ा हाथ है। अगर स्टार्टअप्स और आंत्रप्रेन्योर्स को बढ़ावा दिया जाए और बगैर किसी बाधा और डर के उन्हें काम करने की इजाजत दी जाए तो बड़ी संख्या में नौकरियों के मौके बनेंगे और सरकार के रेवेन्यू में काफी इजाफा होगा।"

उन्होंने कहा कि इन आंत्रप्रेन्योर्स को एक्सप्लोरेशन के लिए बढ़ावा दिया जाना चाहिए। वे प्राइवेट इक्विटी से हासिल फंड की मदद से इस काम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोमेशन और डेटा एनालिटिक्स जैसी लेटेस्ट टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर सकते हैं। ऑयल मिलने के बाद वे अपना लाइसेंस बेच सकते हैं।

Vedanta के चेयरमैन ने कहा, "इंडिया के लिए मेटल्स, रेयर मेटल्स, मिनरल्स और हाइड्रोकार्बंस की अपनी एक्सप्लोरेशन और प्रोडक्शन पॉलिसी में बदलाव करना बहुत जरूरी हो गया है। इंडिया में मेटल्स और मिनरल्स का बड़ा भंडार है, लेकिन यह विडंबना है कि हम साल दर साल इनके आयात पर काफी पैसा खर्च करते हैं। इन सभी मेटल्स का आने वाले दशक में काफी बड़ा रोल होगा, क्योंकि आधुनिक टेक्नोलॉजी तैयार करने सहित इनका व्यापक इस्तेमाल है। "

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