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इनफ्लेशन का सही अंदाजा लगाने में नाकाम रहे दुनिया के केंद्रीय बैंक, अब इनवेस्टर्स भुगत रहे अंजाम

महंगाई का सही अंदाजा लगाने में केंद्रीय बैंकों की नाकामी से उनकी विश्वसनीयता पर असर पड़ा है। अब भी उन्हें यह समझ नहीं आ रहा कि महंगाई का जिन्न आखिर किस तरह काबू में आएगा। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) इसका उदाहरण है

MoneyControl Newsअपडेटेड Jun 15, 2022 पर 1:58 PM
इनफ्लेशन का सही अंदाजा लगाने में नाकाम रहे दुनिया के केंद्रीय बैंक, अब इनवेस्टर्स भुगत रहे अंजाम
Federal Reserve बुधवार को इंटरेस्ट रेट में 0.75 फीसदी वृद्धि कर सकता है। इंडिया में बुधवार देर रात इसके बारे में पता चलेगा।

दुनिया भर के केंद्रीय बैंक (Central Banks) महंगाई के खतरे (Inflation Risk) को भांपने में नाकाम रहे। उन्होंने यह बात मान ली है कि पिछले साल जिस इनफ्लेशन को उन्होंने अस्थायी माना था, उसने अब विकराल रूप धारण कर लिया है। अब वे इसे काबू में करने के लिए अपने सभी हथियारों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसका सीधा असर दुनियाभर के मार्केट्स पर पड़ रहा है। इसका इकोनॉमी की रिकवरी (Economic Recovery) पर भी असर पड़ रहा है।

महंगाई का सही अंदाजा लगाने में केंद्रीय बैंकों की नाकामी से उनकी विश्वसनीयता पर असर पड़ा है। अब भी उन्हें यह समझ नहीं आ रहा कि महंगाई का जिन्न आखिर किस तरह काबू में आएगा। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) इसका उदाहरण है। कुछ हफ्ते पहले फेड चेयरमैन जेरोम पॉवेल और उनकी टीम ने बार-बार कहा था कि इंटरेस्ट रेट आधा फीसदी बढ़ाया जाएगा। अब इंटरेस्ट रेट में 0.75 फीसदी वृद्धि की उम्मीद जताई जा रही है। बुधवार को इसका ऐलान होगा। इंडिया में बुधवार देर रात इसके बारे में पता चलेगा। फेड ने बॉन्ड-पर्चेज प्रोग्राम भी बंद कर दिया है। इसका असर भी बॉन्ड यील्ड पर दिख रहा है।

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यूरोपियन सेंट्रल बैंक (ECB) की प्रेसिडेंट क्रिस्टिन लेगार्ड ने भी अपना रुख अचानक आक्रामक बना दिया है। रिजर्व बैंक ऑस्ट्रेलिया उन केंद्रीय बैंकों में शामिल है, जिन्होंने उम्मीद के मुकाबले इंटरेस्ट रेट में ज्यादा इजाफा किया है। इनवेस्टर्स केंद्रीय बैंकों के रुख में आए बदलाव से कनफ्यूज्ड हैं।

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