दुनिया भर के केंद्रीय बैंक (Central Banks) महंगाई के खतरे (Inflation Risk) को भांपने में नाकाम रहे। उन्होंने यह बात मान ली है कि पिछले साल जिस इनफ्लेशन को उन्होंने अस्थायी माना था, उसने अब विकराल रूप धारण कर लिया है। अब वे इसे काबू में करने के लिए अपने सभी हथियारों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसका सीधा असर दुनियाभर के मार्केट्स पर पड़ रहा है। इसका इकोनॉमी की रिकवरी (Economic Recovery) पर भी असर पड़ रहा है।
