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इंटरेस्ट रेट जनवरी-मार्च तक पीक पर पहुंच सकता है, इकोनॉमिस्ट्स का अनुमान

MPC का फोकस इनफ्लेशन पर बना हुआ है। लगातार तीन तिमाहियों से यह एमपीसी की 2-6 फीसदी की टारगेट रेंज से बाहर बना हुआ है। इसे फ्लेक्सिबल इनफ्लेशन टारगेटिंग फ्रेमवर्क के तहत केंद्रीय बैंक की नाकामी माना जा रहा है

MoneyControl Newsअपडेटेड Oct 18, 2022 पर 5:10 PM
इंटरेस्ट रेट जनवरी-मार्च तक पीक पर पहुंच सकता है, इकोनॉमिस्ट्स का अनुमान
आरबीआई इस फाइनेंशियल ईयर में इनफ्लेशन 6.7 फीसदी पर आ जाने की उम्मीद जता चुका है।

RBI का इंटरेस्ट रेट (Repo Rate) बढ़ाने का सिलसिला जल्द खत्म हो सकता है। कम से कम छह इकोनॉमिस्ट्स ने मनीकंट्रोल को यह बताया। दरअसल, आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) के सदस्यों में इंटरेस्ट रेट वृद्धि को लेकर मतभेद बढ़ा है। सितंबर की एमपीसी की बैठक में इसके संकेत मिले थे।

पिछले महीने की एमपीसी की बैठक में ज्यादातर सदस्य इनफ्लेशन को काबू में करने के लिए इंटरेस्ट रेट को लेकर आक्रामक रुख जारी रखना चाहते थे। लेकिन, एक्सटर्नल मेंबर्स Ashima Goyal और Jayanth Varma का कहना था कि इंटरेस्ट रेट को ज्यादा बढ़ाने से फायदे की जगह नुकसान हो सकता है। वर्मा ने यह भी कहा कि ऐसे वक्त पॉलिसी रेट को हाई रखना खतरनाक हो सकता है, जब इकोनॉमिक ग्रोथ को लेकर तस्वीर काफी धुंधली है।

इकोनॉमिस्ट्स ने कहा कि इनफ्लेशन से जुड़ी चिंता कम हो जाने के बाद एमपीसी अपना फोकस फाइनेंशियल 2023-24 में इकोनॉमिक ग्रोथ पर कर सकती है। एमपीसी अब तक इंटरेस्ट रेट में हुई वृद्धि के असर का आकलन भी कर सकती है।

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