भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की दिसंबर में कुछ रफ्तार कम हो गई, आईएचएस मार्किट के परचेसिंग मैनेजर्स इंडेक्स (Purchasing Managers Index (PMI) एक महीने पहले 57.6 के 10 महीने के उच्च स्तर से 55.5 तक घट गया। गौरतलब है कि 50 से ऊपर की रीडिंग गतिविधि में विस्तार को इंगित करता है, जबकि sub -50 घटने का संकेत देता है।
3 जनवरी को जारी IHS मार्किट सर्वेक्षण (IHS Markit survey) के निष्कर्षों के अनुसार, भारतीय उत्पादकों (Indian manufacturers) ने नए काम और उत्पादन में तेज वृद्धि देखी।
“इंडियन मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए 2021 के अंतिम पीएमआई नतीजे उत्साहजनक थे जिसमें आर्थिक सुधार जारी थे क्योंकि कंपनियों घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय स्रोतों से नए काम मिल रहे थे। आईएचएस मार्किट के इकोनॉमिक एसोसिएट डायरेक्टर पोलीन्ना डी लीमा (Pollyanna De Lima, Economics Associate Director at IHS Markit) ने कहा कि बहुत ज्यादा बिक्री से उत्पादन में और तेजी आई और कंपनियों ने अपने उत्पादन की रिस्टॉकिंग की।
दिसंबर में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए नए ऑर्डर सितंबर के बाद सबसे धीमी गति से बढ़े, लेकिन लगातार छठे महीने अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर में तेजी देखने को मिली।
मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई में भले ही दिसंबर में गिरावट दिखी हो लेकिन 2021 की आखिरी तिमाही में यह औसतन 56.3 रही - जो जनवरी-मार्च तिमाही 2021 के बाद सबसे ज्यादा है।
हालांकि इस रुझान पर आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और मुद्रास्फीति से जोखिम का असर पड़ता है।
IHS Markit के अनुसार इंडियन मैन्युफैक्चर की इनपुट लागत दिसंबर में तेजी से बढ़ी जबकि मुद्रास्फीति की दर घटकर तीन महीने के निचले स्तर पर आ गई थी। फिर भी यह अपने लॉन्ग टर्म एवरेज से ऊपर बनी रही।
मैन्युफैक्चरर्स इन इनपुट पर लंबा समय लेना जारी रखा जिससे अगस्त 2020 के बाद से वेंडर का प्रदर्शन सबसे खराब रहा। IHS Markit ने कहा "विलंब का सामान्य कारण वितरकों के बीच कच्चे माल की कमी से जुड़ा हुआ रहा।"