फाइनेंस मिनिस्ट्री (Finance Ministry) ने कहा है कि इस साल के अंत तक इकोनॉमी की सेहत बेहतर होगी। उसने यह भी कहा है कि बजट (Budget 2022) में एसेट क्रिएशन पर जोर दिया गया है। इससे फिर से इन्वेस्टमेंट बढ़ने का सिलसिला शुरू होगा। करीब दो साल पहले कोरोना की महामारी शुरू होने से इकोनॉमी को काफी नुकसान उठाना पड़ा है।
वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग (Department of Economic Affairs) ने अपनी मासिक आर्थिक रिपोर्ट में कहा है, "कोविड-19 वायरस के चलते पैदा हुई अनिश्चितता और चिंता घटने के बाद कंज्म्पशन बढ़ना शुरू होगा। डिमांड बढ़ने से प्राइवेट सेक्टर भी इन्वेस्टमेंट शुरू होगा।" इस रिपोर्ट में बाहरी कारकों को लेकर चिंता जताई गई है। रिपोर्ट में कहा गया है, "एक्सटर्नल जियोपॉलिटिकल और इकोनॉमिक झटके इकोनॉमी के रिवाइवल के लिए रिस्क हैं। "
रिपोर्ट में कहा गया है कि कोरोना की तीसरी लहर में कुल इकोनॉमिक एक्टिविटी मजबूत बनी रही। कई हाई-फ्रीक्वेसी इंडिकेटर्स से इसका पता चलता है। इनमें बिजली की खपत, पीएमआई मैन्युफैक्चरिंग, एक्सपोर्ट्स, ई-वे बिल जेनरेशन शामिल हैं। अगर ग्लोबल इकोनॉमी में सुस्ती नहीं आती है तो निर्यात की ग्रोथ अच्छी बनी रहेगी। इंपोर्टस में भी वृद्धि जारी रहेगी।
फाइनेंस मिनिस्ट्री ने कहा है कि ओमीक्रॉन के रूप में आई कोरोना की तीसरी लहर पहले आई दो लहरों के मुकाबले काफी कमजोर रही है। इंडियन इकोनॉमी 9 फीसदी से ज्यादा ग्रोथ के रास्त पर है। इस साल ग्रोथ के अग्रिम अनुमान में यह बात कही गई है। आरबीआई (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) ने इस वित्त वर्ष में इनफ्लेशन 5.3 फीसदी रहने का अनुमान जताया है। जनवरी में कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स आधारित इनफ्लेशन बढ़कर 6.01 फीसदी पर पहुंच गया।
इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अकोमोडेटिव मॉनेटरी पॉलिसी के साथ रेपो और रिवर्स रेपो रेट को अपरिवर्तित रखने का मकसद अनिश्चित समय में ग्रोथ को बढ़ावा देना है। अगर अगले वित्त वर्ष में रिटेल इनफ्लेशन 4.5 फीसदी रहता है तो इकोनॉमी में लिक्विडिटी का लेवल हाई बना रहेगा। जीडीपी ग्रोथ के बारे में इस रिपोर्ट में कहा गया है कि बजट का रियल ग्रोथ कंपोनेंट करीब 8 फीसदी था, जो इकोनॉमिक सर्वे के फोरकास्ट के करीब है। आरबीआई ने भी 7.8 फीसदी ग्रोथ का अनुमान जताया है।