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फाइनेंशियल ईयर 2024 की दूसरी छमाही में नहीं बदलेगी सरकार का बॉरोइंग प्लान

फाइनेंस मिनिस्ट्री फाइनेंशियल ईयर 2024 की दूसरी छमाही में सरकार के बॉरोइंग प्लान में कोई बदलाव नहीं करेगी और मार्च में तय प्लान के मुताबिक 6.55 करोड़ रुपये जुटाएगी। मामले से वाकिफ सूत्रों ने मनीकंट्रोल को बताया कि हालांकि, अगर रेवेन्यू और डेफिसिट फाइनेसिंग के दूसरे स्रोत के जरिये गुंजाइश बनती है, तो बाद में इस रकम को कम किया जा सकता है

MoneyControl Newsअपडेटेड Sep 20, 2023 पर 2:33 PM
फाइनेंशियल ईयर 2024 की दूसरी छमाही में नहीं बदलेगी सरकार का बॉरोइंग प्लान
इकनॉमी के लिए ब्याज दरें तय करने में सरकार की मार्केट बॉरोइंग की अहम भूमिका होती है।

फाइनेंस मिनिस्ट्री फाइनेंशियल ईयर 2024 की दूसरी छमाही में सरकार के बॉरोइंग प्लान में कोई बदलाव नहीं करेगी और मार्च में तय प्लान के मुताबिक 6.55 करोड़ रुपये जुटाएगी। मामले से वाकिफ सूत्रों ने मनीकंट्रोल को बताया कि हालांकि, अगर रेवेन्यू और डेफिसिट फाइनेसिंग के दूसरे स्रोत के जरिये गुंजाइश बनती है, तो बाद में इस रकम को कम किया जा सकता है। केंद्र सरकार की योजना वित्त वर्ष 2023-24 में बॉन्ड की बिक्री के जरिये कुल 15.43 लाख करोड़ रुपये जुटाने की है। इनमें से 8.88 लाख करोड़ उधार इस वित्त वर्ष की पहली छमाही में लिए जा रहे हैं।

बॉरोइंग शेड्यूल के मुताबिक, सरकार अपने फिस्कल डेफिसिट की फाइनेसिंग के लिए हर हफ्ते बॉन्ड बेचती है। अक्टूबर 2023-मार्च 2024 की फाइनेसिंग को लेकर ऐलान सितंबर के आखिरी तक किया जाएगा। अगले 6 महीनों की बॉरोइंग कैलेंडर तय करने के लिए फाइनेंस मिनिस्ट्री और रिजर्व बैंक के अधिकारी सितंबर के आखिरी हफ्ते में बैठक करेंगे।

इकनॉमी के लिए ब्याज दरें तय करने में सरकार की मार्केट बॉरोइंग की अहम भूमिका होती है। अगर सरकार ने काफी ज्यादा उधारी ले रखी है, तो इससे कंपनियों के लिए फंड की उपलब्धता कम हो जाती है और लोन लेन की लागत (बॉरोइंग कॉस्ट) बढ़ जाती है। इस वजह से सरकार की बॉरोइंग में किसी भी तरह की कटौती को सकारात्मक संकेत माना जाता है।

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